New Delhi: भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए एक महत्वपूर्ण सैन्य समझौता, ‘इंडो-रूसी रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट’ RELOS आधिकारिक रूप से लागू हो गया है, जो दोनों देशों के बीच रक्षा क्षमता और आपसी समन्वय को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। इस समझौते पर 18 फरवरी 2025 को मॉस्को में हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे दिसंबर 2025 में रूसी संसद स्टेट ड्यूमा की मंजूरी मिली और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा संघीय कानून का दर्जा दिए जाने के बाद यह 12 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया। समझौते के दस्तावेज 18 अप्रैल 2026 को रूस के आधिकारिक कानूनी पोर्टल पर प्रकाशित किए गए, जिससे इसकी विस्तृत शर्तें सार्वजनिक हो गई हैं।
पाँच साल के लिए वैध इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में अस्थायी आधार पर सैन्य सहायता का आदान-प्रदान कर सकेंगे। इसमें एक समय में अधिकतम 3,000 सैन्य कर्मी, 10 सैन्य विमान और 5 युद्धपोतों की तैनाती का प्रावधान है, जो स्थायी सैन्य अड्डे नहीं बल्कि लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के लिए उपयोग किए जाएंगे। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, बंदरगाहों और एयरबेस का उपयोग करना है ताकि ईंधन भरने, मरम्मत, भोजन, परिवहन और चिकित्सा सुविधाओं जैसी जरूरतों को युद्ध और शांति दोनों स्थितियों में पूरा किया जा सके।
यह रणनीतिक कदम इंडो-रूसी ‘स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का विस्तार है, जो संयुक्त सैन्य अभ्यासों जैसे ‘INDRA’ को अधिक कुशल बनाने और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत अभियानों में तेजी लाने में मदद करेगा। साथ ही, यह लंबी दूरी के मिशनों में खर्च और समय की बचत करेगा, जिससे भारत को आर्कटिक और प्रशांत क्षेत्रों में तथा रूस को हिंद महासागर क्षेत्र में बेहतर पहुंच प्राप्त होगी। हालांकि यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के अनुरूप है, लेकिन विश्लेषक इसे दोनों देशों के बीच गहरे होते विश्वास और सामरिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने वाले एक निर्णायक कदम के रूप में देख रहे हैं।
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