Bokaro : बोकारो में बीएसएल प्रबंधन की बकाया वसूली कार्रवाई को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ जहां आम लीजधारकों और प्लॉट मालिकों को नोटिस देकर सख्ती की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ यूनियन से जुड़े आवासों पर लाखों का बकाया होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है।
15 आवासों पर लाखों का बकाया
सूत्रों के मुताबिक, बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन से जुड़े और यूनियन नेता वीरेंद्र नाथ चौबे से संबंधित करीब 15 आवासों पर पानी, बिजली और किराया मद में लगभग 42.5 लाख रुपये बकाया हैं। इसके बावजूद न तो वसूली की प्रक्रिया तेज हुई है और न ही आवास खाली कराने की कोई ठोस पहल नजर आ रही है।
क्वार्टर तोड़कर बना दिया भवन
आरोप है कि यूनियन नेता ने बीएसएल के दो क्वार्टरों को तोड़कर एक बड़ा भवन बना लिया है। आम तौर पर जहां छोटे बदलाव पर भी बीएसएल की सिक्योरिटी तुरंत कार्रवाई करती है, वहीं इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने से प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
दोहरे रवैये का आरोप
बीएकेएस के कार्यकारी अध्यक्ष रणधीर कुमार ने आरोप लगाया कि बीएसएल प्रबंधन आम कर्मचारियों पर सख्ती करता है, लेकिन प्रभावशाली नेताओं के मामले में नरमी बरतता है। उन्होंने इसे प्रबंधन का दोहरा रवैया बताया।
क्या कहता है प्रबंधन
वहीं बीएसएल के संचार प्रमुख मणिकांत धान का कहना है कि जिनका भी किराया या बिजली बिल बकाया होता है, उन्हें रिमाइंडर दिया जाता है और जरूरत पड़ने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी की जाती है। उन्होंने कहा कि किसी विशेष मामले की जानकारी संबंधित विभाग ही दे सकता है।
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