Ranchi : लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में सीएम हेमंत सोरेन को टैग करते हुए झारखंड में बुनियादी सुविधाओं की कमी और मुख्यमंत्री के आलीशान आवास निर्माण को लेकर तीखा हमला बोला है। मरांडी का कहना है कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयों का अभाव है और लोग मामूली इलाज के लिए भी दूसरे राज्य के शहरों का रुख करने को मजबूर हैं।
झारखंड में आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखने को मिलती है। राज्य के अनेक ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयों का अभाव है और लोगों को मामूली इलाज के लिए भी दूसरे राज्य के…
— Babulal Marandi (@yourBabulal) March 7, 2026
जनता की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान नहीं
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यदि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता जनता की मूलभूत समस्याओं के समाधान की बजाय अपने लिए आलीशान भवन बनाने पर केंद्रित है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि कई बच्चों को पढ़ाई पूरी करने के लिए घर के गहने तक बेचना पड़ रहा है, लेकिन हेमंत सोरेन लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से ‘शीशमहल’ जैसी भव्य रिहायश का निर्माण करा रहे हैं।
लोकतंत्र और जनसेवा की मिसाल
मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा होती है कि वे सादगी और जनसेवा की मिसाल पेश करें। लेकिन उनके अनुसार, सोने के चम्मच से जन्मे हेमंत जी की परवरिश रजवाड़ों जैसी रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हेमंत जी दलालों, बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों के संगत में रहते हुए, अपनी जिम्मेदारियों की जगह कमीशन और कमाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।
छात्रवृत्ति और पेंशन के मुद्दे
बाबूलाल मरांडी ने सीएम पर यह भी हमला किया कि छात्रों की स्कॉलरशिप और बुजुर्गों की पेंशन रोककर, हेमंत जी हर मंच पर झारखंड की गरीबी का रोना रोते हैं, लेकिन खुद 100 करोड़ के शीशमहल का निर्माण करवा रहे हैं। मरांडी ने सवाल उठाया कि ऐसे में मुख्यमंत्री यह भव्य आवास कैसे जायज ठहरा सकते हैं, जबकि आम जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
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