Darbhanga/Saharsa : बिहार के मिथिला और कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। दरभंगा के लहेरियासराय से सहरसा तक नई रेल लाइन बनने वाली है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी देने की औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली हैं और अब रेल मंत्रालय ने इसे नीति आयोग को भेज दिया है। जैसे ही आयोग से हरी झंडी मिलेगी, यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा। इस नई रेल लाइन से न सिर्फ बिहार, बल्कि पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी भी और मजबूत होगी।
क्या है इस नई रेल लाइन का प्लान?
दरभंगा के सांसद और रेलवे स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य गोपालजी ठाकुर ने जानकारी दी कि इस नई रेल लाइन की लंबाई लगभग 95 किलोमीटर होगी और इसका अनुमानित खर्च 2376 करोड़ रुपये है। इस रूट पर कुल 10 क्रॉसिंग स्टेशन और 2 हॉल्ट स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को बेहतर यात्री सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि इस रूट पर कोसी नदी पर एक बड़ा पुल बनेगा, जो इंजीनियरिंग के लिहाज से बड़ी उपलब्धि होगी। इसके अलावा, 14 बड़े पुल, 41 छोटे पुल और 72 अंडरपास बनेंगे। इससे सड़क और रेल दोनों का यातायात आसान होगा।
यात्रा और समय की बचत
गोपालजी ठाकुर ने बताया कि नई रेल लाइन बनने के बाद समस्तीपुर, खगड़िया और मानसी होकर जाने वाले मौजूदा मार्ग में लगभग 75 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इसका मतलब है कि यात्रा का समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और रेल परिचालन और कुशल होगा। पूर्वोत्तर भारत जाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग भी बन जाएगा, जिससे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क और मजबूत होगा।
स्थानीय लोगों के लिए वरदान
इस नई रेल लाइन से दरभंगा, बहादुरपुर, हायाघाट, बेनीपुर, अलीनगर, गौड़ाबौराम और कुशेश्वरस्थान के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर रेल सुविधा मिलने से शिक्षा, रोजगार, व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह प्रोजेक्ट जीवन स्तर में सुधार लाएगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा जोर
नई रेल लाइन के निर्माण से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। निर्माण के दौरान हजारों लोगों को नौकरी मिलेगी, और बाद में रेलवे से जुड़ी सेवाओं, पर्यटन और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। मिथिला और कोसी क्षेत्र कृषि प्रधान इलाके हैं। धान, मक्का, गेहूं, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद अब आसानी से देश के अन्य हिस्सों में भेजे जा सकेंगे। किसानों को सही समय पर और उचित मूल्य मिल सकेगा। सहरसा और दरभंगा जैसे शहरों को देश के बड़े शहरों से जोड़ने में भी यह रेल लाइन मददगार साबित होगी। इससे छात्रों, नौकरीपेशा और व्यापारियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
रणनीतिक महत्व
कोसी क्षेत्र अक्सर बाढ़ जैसी आपदाओं से प्रभावित होता है। इस नई रेल लाइन से एक मजबूत वैकल्पिक मार्ग तैयार होगा। आपातकालीन परिस्थितियों में राहत सामग्री और बचाव दल जल्दी पहुंच सकेंगे। इसके अलावा, यह रूट पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने के लिए भी अहम है। मौजूदा रूट पर दबाव कम होगा और रेल नेटवर्क और लचीला बनेगा। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स दोनों मजबूत होंगे।
संभावित रूट और स्टेशन
नई रेल लाइन के संभावित स्टेशन इस प्रकार हैं :
लहेरियासराय – देकुली – उघरा – खैरा – बिठौली – शंकररोहार – हावीडीह – सजनपुर – कन्हौली – जगदीशपुर – घनश्यामपुर – किरतपुर – जमालपुर – महिषी – बनगांव – सहरसा जंक्शन
इन सभी जगहों पर स्टेशन और हॉल्ट बनने से स्थानीय लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
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