Latehar : लातेहार जिले के महुआडांड़ थाना क्षेत्र के ओरसा घाटी में हुई बस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। इस हादसे की पुष्टि एसडीएम विपिन कुमार दुबे ने की है। मृतकों में चार महिलाएं और छह पुरुष शामिल हैं। एसडीएम के अनुसार, पांच लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी, जबकि पांच अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे में जख्मी लगभग 40 लोगों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है, जबकि 35 से अधिक घायलों का इलाज महुआडांड़ में चल रहा है।
वैवाहिक कार्यक्रम में जा रही थी बस
हादसे का शिकार सभी लोग छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रहने वाले थे। सभी लोग एक रिजर्व बस से बलरामपुर से महुआडांड़ के लोध गांव वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे थे। इसी दौरान ओरसा घाटी में बस का ब्रेक फेल हो गया और बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
सभी मृतकों की हुई पहचान
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान कर ली गई है। मृतकों में सीतापति देवी, प्रेमा देवी, सोनामती देवी, रेशन्ति चेरवा, सुखना भुइयां, विजय नगेसिया, लीलावती सोनवानी, रमेश मनिका, फगुआ राम और परशुराम सोनवानी शामिल हैं।
सड़क निर्माण में खामी का आरोप
घटना के बाद छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कई जनप्रतिनिधि महुआडांड़ पहुंचे। सरपंच संघ के अध्यक्ष संतोष इंजीनियर ने दुर्घटना वाली सड़क के निर्माण में गंभीर तकनीकी खामी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सड़क पर ढलान 15 डिग्री से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि यहां लगभग 30 डिग्री की ढलान है, जिससे बस का ब्रेक फेल हुआ। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में ऐसी गलतियां भविष्य में भी बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं।
बस में क्षमता से अधिक लोग थे सवार
बताया जा रहा है कि बस की बैठने की क्षमता 45 लोगों की थी, लेकिन उसमें 90 से अधिक लोग सवार थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान अक्सर वाहनों में अधिक लोग सफर करते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से ओवरलोडिंग पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है।
एसडीएम की तत्परता से बचीं कई जानें
एसडीएम विपिन कुमार दुबे ने हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कराया। आसपास के प्रखंडों, लातेहार जिला मुख्यालय, गुमला जिला और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों से एंबुलेंस और चिकित्सा टीमों को बुलाया गया। एक घंटे के भीतर 25 से अधिक एंबुलेंस मौके पर पहुंचाई गईं। घायलों को प्राथमिक इलाज के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया, जिससे समय पर उपचार मिल सका और कई लोगों की जान बचाई जा सकी।
Also Read : सासाराम स्टेशन पर RPF की बड़ी कार्रवाई, कालका मेल से 311 जिंदा कछुए बरामद

