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    Home»झारखंड»22 जून से आर्द्रा, नहीं होंगे कृषि कार्य, सूर्य के गोचर से मौसम में होगा बड़ा परिवर्तन
    झारखंड

    22 जून से आर्द्रा, नहीं होंगे कृषि कार्य, सूर्य के गोचर से मौसम में होगा बड़ा परिवर्तन

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJune 21, 2025No Comments3 Mins Read0
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    22 जून
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    Ranchi : असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में 22 जून से 25 जून तक अंबूबाची महापर्व मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दौरान माता कामाख्या रजस्वला होती हैं, अतः मंदिर में पूजा-अर्चना बंद रहती है। इस अवधि को शक्ति की विशेष उपासना का समय माना जाता है।

    धरती भी होती है रजस्वला, आर्द्रा नक्षत्र में नहीं होते कृषि कार्य

    आचार्य प्रणव मिश्रा के अनुसार, आर्द्रा नक्षत्र का प्रथम चरण 22 से 25 जून तक चलता है। इस दौरान धरती को रजस्वला माना जाता है और कृषि कार्य जैसे जुताई व बुआई वर्जित रहते हैं। इस समय को देवी-देवताओं की पूजा और वंदना का काल माना गया है। भूमि को विश्राम देकर उसे उर्वर बनाने की परंपरा जुड़ी है।

    सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश, मानसून और ऋतु परिवर्तन की शुरुआत

    22 जून को दोपहर 1:45 बजे सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर गए हैं और 6 जुलाई तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। इसके बाद सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य प्रणव मिश्रा के अनुसार, मत्स्य पुराण में आर्द्रा नक्षत्र को देवी-देवताओं की पूजा के लिए अत्यंत शुभ काल बताया गया है।

    इस नक्षत्र के देवता रुद्र (शंकर का उग्र रूप) हैं और आर्द्रा का अर्थ होता है ‘नमी’। यही वह समय है जब भारत में मानसून का आगमन होता है और वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है। इस नक्षत्र में की गई पूजा को फलदायक माना गया है।

    खाने-पीने की परंपराएं और सावधानियां

    आर्द्रा नक्षत्र के दौरान विशेष रूप से खीर और दाल की पुरी बनाकर खाई जाती है। इस समय आम का सेवन परंपरा अनुसार किया जाता है, लेकिन जैसे ही आर्द्रा नक्षत्र समाप्त होता है, आम और जामुन का त्याग कर दिया जाता है।

    इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से इन फलों में सूक्ष्म जीवाणु उत्पन्न हो जाते हैं जो बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

    22 से 25 जून तक का यह समय भारतीय संस्कृति और ज्योतिष के अनुसार अत्यंत पवित्र और संवेदनशील माना गया है। यह न केवल धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा का समय है, बल्कि प्रकृति के चक्र के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का प्रतीक भी है। आमजन से अपील की जाती है कि इस दौरान परंपरा का पालन करते हुए सतर्कता बरतें और भूमि, प्रकृति तथा देवी-देवताओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करें।

    प्रसिद्ध ज्योतिष
    आचार्य प्रणव मिश्रा
    आचार्यकुलम, अरगोड़ा, रांची
    8210075897

    Also Read :  CBI ने RSETI के डायरेक्टर को 20 हजार रुपए घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा

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