Chandil: झारखंड के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ईचागढ़ प्रखंड की सोड़ो पंचायत स्थित हाड़ात गांव में शुक्रवार को हाथियों के झुंड ने एक मां और उसकी बेटी को कुचलकर मार डाला। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों के बीच वन विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है।
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार को जंगली हाथी के हमले में मां-बेटी की मौत के बाद शनिवार को हाड़ात गांव में किसी घर में चूल्हा नहीं जला। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी अचानक रिहायशी इलाके में आ धमके, जिससे बचने का मौका नहीं मिला। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों को ग्रामीणों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने हाथियों से सुरक्षा की गुहार लगाई है और इसे लेकर वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
4 महीने में 3 मौतें, बेकाबू हाथियों का आतंक
चांडिल अनुमंडल में हाथियों का उत्पात कितना भयावह है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महज चार महीनों में तीन लोगों की जान जा चुकी है। इससे पहले 11 अप्रैल को जंगली हाथी ने कुकड़ू प्रखंड के सापारूम में 55 वर्षीय राधा तांती को पटक कर मार डाला था। इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों में आधे दर्जन से अधिक लोग हाथियों के हमले में घायल हो चुके हैं।
प्रशासन पर सवाल: ‘प्रभारी रेंजर’ के भरोसे क्षेत्र
हाथियों के इतने बड़े खतरे के बावजूद, चांडिल वन क्षेत्र की कमान एक ‘प्रभारी रेंजर’ के हाथों में है। विमद कुमार के पास चांडिल और घाटशिला के अलावा सात अन्य क्षेत्रों का अतिरिक्त प्रभार है। एक साथ इतनी जिम्मेदारियां होने के कारण, क्षेत्र में हाथियों की निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा पर जो ध्यान दिया जाना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि स्थानीय लोग प्रशासन की सुस्ती से नाराज हैं।
वन विभाग की कार्रवाई और मुआवजा
दलमा वन अभयारण्य के डीएफओ (DFO) सबा आलम अंसारी ने बताया कि फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में एक ‘ड्राइव टीम’ तैनात की गई है, जिसका काम हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ना है। उन्होंने कहा कि घायलों को तत्काल राहत के रूप में 10-10 हजार रुपये दिए गए हैं और इलाज का पूरा खर्च विभाग उठाएगा।
अंतिम संस्कार में दिखा गम और गुस्सा
जैसे ही मां और बेटी का शव गांव पहुंचा, कोहराम मच गया। देर शाम गांव के पास ही मां का दाह संस्कार कर दिया गया और बेटी को दफनाया गया। इस दौरान ग्रामीणों की आंखों में आंसू थे और प्रशासन के प्रति गुस्सा साफ दिख रहा था। लोगों का कहना है कि अगर वन विभाग ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में और भी जानें जा सकती हैं।
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