New Delhi: देश के बैंकिंग और वित्तीय ढांचे की सुरक्षा को लेकर सरकार ने ‘मिथॉस एआई’ (Mythos AI) से उत्पन्न संभावित खतरों पर गंभीरता दिखाई है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों के प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस नए और उन्नत मॉडल से बैंकिंग प्रणालियों को सुरक्षित रखने की रणनीति तैयार करना था।
क्या है ‘मिथॉस एआई’ और क्यों है चिंता?
एन्थ्रोपिक कंपनी द्वारा विकसित ‘क्लाउड मिथॉस प्रिव्यू’ (Claude Mythos Preview) नामक यह एआई मॉडल दुनिया भर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। यह मॉडल ऑपरेटिंग सिस्टम (Windows, Linux) और वेब ब्राउज़र्स की सुरक्षा में सेंध लगाने में सक्षम है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एआई मॉडल दशकों पुरानी खामियों को भी पलक झपकते ही पहचान सकता है। इसकी क्षमताएं मानव विशेषज्ञों से भी कहीं अधिक हैं, जिसके कारण यह ‘जीरो-डे’ कमजोरियों (ऐसी कमजोरियां जिनका पता अब तक किसी को नहीं चला है) का फायदा उठाकर हमलों की एक पूरी श्रृंखला बना सकता है। सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए कंपनी ने इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन इसकी अनधिकृत पहुंच (unauthorized access) की खबरों ने वैश्विक वित्तीय जगत में हड़कंप मचा दिया है।
बैठक में बनी सुरक्षा रणनीति
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को ‘प्री-एम्प्टिव’ (पूर्व-निवारक) मोड में डालने का निर्देश दिया है। बैठक में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा हुई:
मजबूत सुरक्षा ढांचा: बैंकों को अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने के लिए कहा गया है।
थ्रेट इंटेलिजेंस शेयरिंग: किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्टिंग और बैंकों के बीच ‘रियल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस’ साझा करने पर जोर दिया गया है, ताकि साइबर हमलों को होने से पहले ही रोका जा सके।
सरकारी जवाबदेही: सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार इस मामले पर एन्थ्रोपिक कंपनी से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांग रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तकनीक का दुरुपयोग न हो।
ग्राहकों के लिए सतर्कता की सलाह
साइबर हमलों के इस बढ़ते खतरे के बीच, विशेषज्ञों और सरकार ने आम बैंक ग्राहकों को भी सचेत रहने की सलाह दी है। अपने ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट्स को सुरक्षित रखने के लिए ग्राहकों को बुनियादी साइबर स्वच्छता अपनाने की आवश्यकता है:
1. दो-चरणीय प्रमाणीकरण (2FA): हर अकाउंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य रूप से सक्रिय रखें।
2. मजबूत पासवर्ड: सभी अकाउंट्स के लिए जटिल और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करें।
3. सिस्टम अपडेट: अपने मोबाइल और कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करते रहें ताकि सुरक्षा पैच अपडेट हो सकें।
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