भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शनिवार, 10 अक्टूबर को झारखंड के देवघर पहुंचे. यहां उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और आदिवासी समुदायों तक बेहतर इलाज पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि उनकी शिक्षा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है.
उपराष्ट्रपति का यह दौरा झारखंड के लिहाज से इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक राज्य के राज्यपाल रह चुके हैं. राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने झारखंड की खनिज संपदा, गरीबों के जीवन स्तर, आदिवासी समुदायों की स्थिति और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखी थी. देवघर में उनके कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ आदिवासी और ग्रामीण आबादी तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का विषय प्रमुखता से सामने आया.
चिकित्सा में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण
एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में कुल 173 विद्यार्थियों के स्नातक किया है. जिनमें 132 छात्राएं शामिल थीं. समारोह में एमबीबीएस, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग और एमडी-एमएस पाठ्यक्रमों से जुड़े विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करने का कार्यक्रम था. जिसमें 11 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया
उपराष्ट्रपति ने चिकित्सा शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है. उन्हें उन लोगों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए, जिन्हें भौगोलिक दूरी, आर्थिक परेशानी और जागरूकता की कमी के कारण बेहतर इलाज नहीं मिल पाता.
उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीमेडिसिन और डिजिटल डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया. इन तकनीकों से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद मिल सकती है. झारखंड के आदिवासी बहुल और ग्रामीण इलाकों के संदर्भ में यह मुद्दा खास महत्व रखता है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच कई स्थानों पर अब भी चुनौती बनी हुई है.
आदिवासी नायकों का उल्लेख, वंचित समुदायों की सेवा की अपील
अपने संबोधन में सीपी राधाकृष्णन ने भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू और तिलका मांझी जैसे आदिवासी नायकों की विरासत का उल्लेख किया. उन्होंने विद्यार्थियों को दूरदराज के गांवों और आदिवासी समुदायों की सेवा करने के लिए प्रेरित किया. उनके संबोधन का प्रमुख संदेश यह था कि चिकित्सा शिक्षा का लाभ समाज के उन वर्गों तक भी पहुंचना चाहिए, जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है.
उन्होंने एम्स देवघर की ओर से मलेरिया उन्मूलन, लिम्फैटिक फाइलेरियासिस की निगरानी, एनीमिया, श्रवण स्वास्थ्य और स्कूली स्वास्थ्य से जुड़े सामुदायिक कार्यक्रमों की सराहना की. ये कार्यक्रम अस्पताल की सेवाओं को परिसर से बाहर समुदायों तक पहुंचाने के प्रयासों का हिस्सा हैं.
संताल परगना जैसे क्षेत्र में इन बीमारियों की रोकथाम, समय पर जांच और इलाज की उपलब्धता सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण विषय हैं. ऐसे में एम्स देवघर की भूमिका केवल उच्चस्तरीय इलाज देने तक सीमित नहीं, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान, रोकथाम और जागरूकता बढ़ाने में भी है. उपराष्ट्रपति देवघर दौरे के बाद बीबीएमटी अस्पताल में आयोजित सैन्य संपर्क मेले में शामिल हुए.

