Washington/Tehran: वैश्विक तनाव एक बार फिर से खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाले विशाल कार्गो जहाज ‘एम/वी तौस्का’ को जबरन अपने कब्जे में ले लिया है। यह घटना उस समय हुई जब जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश कर रहा था
6 घंटे की चेतावनी, फिर हुई गोलीबारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि तौस्का, जो लगभग 900 फीट लंबा है और एक एयरक्राफ्ट कैरियर के वजन के बराबर है, लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अमेरिकी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर ‘यूएसएस स्प्रुएंस’ ने जहाज को रोकने के लिए लगभग 6 घंटे तक बार-बार चेतावनी दी थी। चेतावनी की अनदेखी किए जाने के बाद, अमेरिकी नौसेना ने जहाज के इंजन रूम को खाली कराने का निर्देश दिया। जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो नौसेना ने 5-इंच MK 45 गन से कई राउंड फायर किए। इस गोलीबारी में जहाज का प्रोपल्शन सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद अमेरिकी मरीन हेलिकॉप्टरों से नीचे उतरे और जहाज को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। घटना का वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें मरीन के जहाज पर चढ़ने के दृश्य देखे जा सकते हैं।
“जल्द और उचित” जवाब देंगे- ईरान
इस कार्रवाई पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरानी सैन्य कमांड ने इसे “सशस्त्र समुद्री डकैती” और युद्धविराम का सीधा उल्लंघन करार दिया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि वे इस घटना का “जल्द और उचित” जवाब देंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की यह चेतावनी इस क्षेत्र में नाजुक शांति को खतरे में डाल सकती है, खासकर तब जब पाकिस्तान में महत्वपूर्ण शांति वार्ता शुरू होने वाली है। यह पहला मौका है जब अमेरिकी ब्लॉकेड शुरू होने के बाद किसी जहाज को इस तरह जबरन रोका गया है; इससे पहले 25 अन्य जहाज चेतावनियों के बाद वापस लौट गए थे।

वैश्विक सुरक्षा और तेल कीमतों पर असर
यह घटना इसलिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। यहाँ से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है। अमेरिका ने पहले ही ईरानी बंदरगाहों पर कड़े प्रतिबंध और ब्लॉकेड लगा रखे हैं, जबकि ईरान ने पूर्व में चेतावनी दी थी कि यदि उसके जहाजों को रोका गया, तो वह इस पूरे जलमार्ग को बंद कर सकता है।
फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान वास्तव में कोई सैन्य जवाब देगा या यह स्थिति कूटनीतिक स्तर पर सुलझाई जाएगी। आने वाले कुछ दिन मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
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