Godda : गोड्डा जिला सदर अस्पताल में सोमवार की अहले सुबह एक शिक्षक की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने डॉक्टरों और एएनएम पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया और अस्पताल परिसर में विरोध जताया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक और नर्स मौके से हट गए। बाद में नगर थाना पुलिस के पहुंचने और समझाने के बाद मामला शांत हुआ।मृतक की पहचान मेहरमा थाना क्षेत्र के हुलूकपुर गांव निवासी 48 वर्षीय आशुतोष कुमार निराला के रूप में हुई है। वह देवघर जिले के मोहनपुर प्रखंड के एक विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि उनकी नियुक्ति करीब छह महीने पहले ही हुई थी। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार में पत्नी नीलम देवी, एक बेटा और दो बेटियां हैं।
सीने में दर्द के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
परिजनों के मुताबिक रविवार शाम आशुतोष कुमार निराला के सीने में अचानक तेज दर्द उठा। दर्द इतना ज्यादा था कि वह घर में ही गिर पड़े। इसके बाद परिवार के लोग उन्हें तुरंत मेहरमा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार किया गया, लेकिन हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। जब मेहरमा में इलाज से राहत नहीं मिली तो परिजन रात करीब ढाई बजे उन्हें लेकर गोड्डा सदर अस्पताल के लिए रवाना हुए। सुबह करीब चार बजे वे अस्पताल पहुंचे। परिजनों का कहना है कि उस समय उन्होंने दरवाजा खटखटाकर ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर को जगाया, जिसके बाद मरीज की जांच की गई।
इंजेक्शन लगने के बाद हालत बिगड़ने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने जांच के बाद नर्स को एक इंजेक्शन लगाने का निर्देश दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद आशुतोष कुमार निराला की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिवार का दावा है कि मरीज की हालत खराब होते देख उसे तत्काल आईसीयू में शिफ्ट किया गया। हालांकि जब परिजन उन्हें लेकर आईसीयू पहुंचे तो वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
अस्पताल कर्मियों पर गंभीर आरोप
मृतक के परिजनों का कहना है कि यदि समय पर सही इलाज मिलता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। उनका आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसी वजह से एक शिक्षक की जान चली गई। शिक्षक की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में माहौल गर्म हो गया। परिजनों और ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए मौके पर मौजूद डॉक्टर और एएनएम वार्ड से हट गए। इससे अस्पताल में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिस ने परिजनों से बातचीत की और उन्हें शांत कराने की कोशिश की। काफी समझाने-बुझाने के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को अपने पैतृक गांव हुलूकपुर ले गए। आशुतोष कुमार निराला की मौत की खबर गांव पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के साथ-साथ गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं। एक ओर जहां परिजन अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, वहीं इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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