Lohardaga : पड़हा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड और आदिवासी पारंपरिक अधिकारों के मुद्दे को लेकर शनिवार को झारखंड बंद का आह्वान किया गया है। बंद से पहले शुक्रवार को लोहरदगा जिले में विभिन्न आदिवासी और पारंपरिक संगठनों की ओर से मशाल जुलूस निकाला गया। मशाल जुलूस की अगुवाई राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के राष्ट्रीय महासचिव जालेश्वर उरांव, जिलाध्यक्ष सोमदेव उरांव और केंद्रीय सरना समिति के संरक्षक मनि उरांव ने की। जुलूस के दौरान “जागो रूढ़िजन्य जनजाति जागो” जैसे नारों से क्षेत्र गूंज उठा।
आदिवासी नेताओं ने मांग की कि पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या में शामिल सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय, मुआवजा और सुरक्षा देने की मांग की गई। नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन आदिवासी समाज की अस्मिता, जमीन और परंपरागत व्यवस्था की रक्षा के लिए है। आदिवासी संगठनों ने झारखंड सरकार द्वारा 23 दिसंबर 2025 को पारित पेसा कानून की नियमावली पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह नियमावली पारंपरिक ग्राम सभाओं के अनुरूप नहीं है, जिससे आदिवासियों की संस्कृति, परंपरा और जमीन पर खतरा पैदा हो गया है।
संगठनों ने भूमि माफियाओं के खिलाफ विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने, सीएनटी-एसपीटी एक्ट का सख्ती से पालन करने, पेसा कानून को मजबूत करने और ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार देने की मांग की। इसके अलावा आदिवासी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस सुरक्षा देने तथा नए-पुराने भूमि घोटालों की जांच के लिए उच्चस्तरीय आयोग गठित करने की भी मांग उठाई गई। मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए। इसमें राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, वेल पड़हा सरना समिति, लोहरा समाज, आदिवासी छात्रावास के छात्र-छात्राएं और कई अन्य संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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