Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»बिजनेस»नोटबंदी के तीन साल: बैंकों में घटी और घरों में जमा हुई नकदी, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
    बिजनेस

    नोटबंदी के तीन साल: बैंकों में घटी और घरों में जमा हुई नकदी, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

    Team JoharBy Team JoharNovember 8, 2019No Comments5 Mins Read0
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    JoharLive Desk

    नई दिल्ली : नोटबंदी को आज तीन साल पूरे हो गए हैं। आज ही के दिन रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए इसकी घोषणा की थी। तब उन्होंने इसे लागू करने के पीछे कई सारे कारण बताएं थे, जिस पर चोट करने की बात कही गई थी। काला धन, आतंकवाद, बड़े नोटों की जमाखोरी, नकली नोट जैसे मुद्दे प्रमुख थे। नोट बंद होने के बाद सरकार की तरफ से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की बात कही गई थी।
    नवंबर 2016 के बाद जहां डिजिटल भुगतान में बढ़ोतरी देखने को मिली, वहीं अन्य कारण जो उस वक्त बताए गए थे, उनमें किसी तरह की कमी नहीं आई है। नोटबंदी के बाद जो दो हजार रुपये का नोट शुरू किया गया था, लेकिन उसकी भी छपाई को रोक दिया है। आरबीआई ने इस नोट को एटीएम से भी देने पर रोक लगा दी है। बैंक अब एटीएम में से दो हजार रुपये के नोट की कैसेट को निकाल कर 500, 200 और 100 रुपये की कैसेट ज्यादा लगा रहे हैं। बैंक का तर्क है कि लोग दो हजार के नोट की जमाखोरी करने लगे हैं। इस वजह से इसकी छपाई रोक दी गई है। वहीं अब यह नोट केवल बैंक शाखाओं में मिल रहा है।
    नोटबंदी के दौरान सरकार ने कहा था कि वो नकदी का प्रचलन कम करने के लिए डिजिटल और कार्ड से भुगतान को ज्यादा बढ़ावा देंगे। तीन साल बाद जहां एक तरफ डिजिटल भुगतान में बढ़ावा देखने को मिला है, वहीं दूसरी तरफ नकदी आज भी लोगों की जरूरत है। नकदी का प्रचलन कहीं से भी कम नहीं हुआ है।
    भारत में लोग डिजिटल लेनदेन के लिए यूपीआई (UPI) यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस का काफी इस्तेमाल करते हैं। तीन साल पहले लॉन्च हुए यूपीआई के जरिए अक्तूबर माह में एक अरब लेनदेन हुए हैं। वहीं पिछले महीने सितंबर में इसके जरिए 95.5 करोड़ लेनदेन हुए थे। इसके साथ ही यूपीआई सबसे तेजी से बढ़ने वाला सिस्टम बन गया है।

    हालांकि उस वक्त डिजिटल ट्रांजेक्शन में बढ़ावा देखने को मिला था, लेकिन जैसे-जैसे नकदी की स्थिति सुधरी डिजिटल ट्रांजेक्शन कम होने लगे। डिजिटल भुगतान में भी धोखाधड़ी के मामले ज्यादा सामने आने के चलते भी लोग फिर से नकद ट्रांजेक्शन ज्यादा करने लगे हैं।

    अर्थशास्त्री मोहन गुरुस्वामी का कहना है कि नोटबंदी के बाद लोगाें में बैंकों में धन जमा करने को लेकर शंका बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार, 2011-12 से 2015-16 तक बाजार में चल रही कुल नकदी की तुलना में महज 9-12 फीसदी नकदी ही लोग घरों में जमा करते थे। 2017-18 में यह आंकड़ा बढ़कर 26 फीसदी हो गया। हालांकि, इस दौरान डिजिटल लेनदेन को काफी बढ़ावा मिला है। अक्तूबर में यूपीआई के जरिये 1 अरब डिजिटल ट्रांजेक्शन किए गए। इसके अलावा पेटीएम, अमेजन-पे, गूगल-पे, फोन-पे जैसे भुगतान एप के जरिये भी डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहा है।
    नोटबंदी का सबसे बड़ा कारण काला धन था। हालांकि यह कम होने के बजाए बढ़ता गया है। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा या फिर विधानसभा के चुनाव हों, बड़ी अरबों रुपये जांच एजेंसियों को दो हजार और पांच सौ के नोट मिले है, जिनका कोई हिसाब-किताब नहीं था। आयकर अधिकारियों द्वारा समय-समय पर मारे जा रहे छापों में भी यह बात सामने आ रही है, जिसमें लोगों के पास बड़ी संख्या में ऐसे नोट मिले हैं।
    अगर नोटबंदी से पहले के समय की बात करें, तो नकली नोटों का प्रचलन काफी ज्यादा था। नोटबंदी के बाद इस बारे में आरबीई ने एक रिपोर्ट भी जारी की है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डाटा के मुताबिक, देश में नकली नोटों के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2017-18 के मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में नकली नोटों में 121 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2,000 रुपये के नकली नोटों की बात करें, तो यह आंकड़ा 21.9 फीसदी है। 200 रुपये के 12,728 जाली नोट मिले, जबकि पिछले साल सिर्फ 79 ही पकड़े गए थे।

    वैल्यू के लिहाज से देखा जाए, तो मार्च 2019 के आखिर तक 500 और 2000 के नोटों की हिस्सेदारी कुल वैल्यू में 82.2 फीसदी थी। आरबीआई के मुताबिक, यह आंकड़ा मार्च 2018 के अंत में 80.2 फीसदी था। इसके अलावा, समान अवधि में क्रमशः 10, 20 और 50 रुपये में पाए गए नकली नोटों में 20.2 फीसदी, 87.2 फीसदी और 57.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। हालांकि 100 के मूल्यवर्ग में पाए गए नकली नोटों में 7.5 फीसदी की गिरावट देखी गई है।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दिनों सदन में एक सवाल के जवाब में कहा था कि 4 नवंबर, 2016 को बाजार में कुल 17,741 अरब रुपये के मूल्य के बराबर नकदी चलन में थी, जो 29 मार्च 2019 तक बढ़कर 21,137.64 अरब रुपये पहुंच गई। इस तरह बाजार में 3,396 अरब रुपये की नकदी ज्यादा चल रही है। इसी तरह, एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2016 में जहां 24.61 करोड़ के नकली नोट पकड़े गए थे, वहीं 2017 में यह बढ़कर 28 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, इसके बाद नकली नोटों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।
    नोटबंदी के वक्त कहा गया था, कि इससे आतंकी और कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आएगी। हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। दक्षिण एशिया आतंकी पोर्टल (एसएटीपी) के डाटा के अनुसार 2016,2017 और 2018 में 2015 के मुकाबले आतंकी घटनाओं में इजाफा देखा गया। 2015 में जहां 728 लोग आतंकी हमले का शिकार हुए थे, वहीं इनकी संख्या 2016 में 905, 2017 में 812 और 2018 में 940 पर पहुंच गई।

    #Business news #Online news Latest news
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleजम्मू-कश्मीर: एक बार फिर पाकिस्तान की नापाक हरकत, तोड़ा सीजफायर, जवान शहीद
    Next Article आज 08 नवंबर का राशिफल : क्या कहते हैं आपके सितारे, जानिए

    Related Posts

    झारखंड

    रांची में सजेगा बिजनेस का सबसे बड़ा मेला : मोरहाबादी में भूमि पूजन के साथ ‘एक्सपो उत्सव 2026’ की तैयारियां शुरू

    September 21, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    जोहार लाइव पड़ताल : खनिज संपदा भरपूर, फिर भी निवेश रैंकिंग में नीचे से दूसरा: आखिर कहां पिछड़ा झारखंड?

    September 21, 2026
    खेल-सिनेमा

    झारखंड : दूरदर्शन के नए धारावाहिक ‘लापता पलाश’ के लिए रांची में ऑडिशन, 150 से ज्यादा कलाकारों ने दिखाया हुनर

    September 20, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड सहकारी बैंक घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, झारखंड-ओडिशा के 7 ठिकानों पर छापेमारी

    September 18, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    फॉरेस्ट क्लीयरेंस में फंसी 5 खदानें, झारखंड सरकार ने रद्द की लीज; अब दोबारा नीलामी

    September 16, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    FJCCI चुनाव: मुकेश अग्रवाल को मिले सबसे ज्यादा वोट, लेकिन अध्यक्ष पद की रेस में तुलसी पटेल का पलड़ा भारी

    September 13, 2026
    Latest Posts

    Johar Live Exclusive : 14वीं JPSC और FRO परीक्षा में लालू यादव की भूमिका पर सीआईडी का बड़ा दावा, 8 लाख का चेक और दूसरे अभ्यर्थी की OMR कॉपी बरामद

    September 21, 2026

    झारखंड : 26 बच्चों की हार्ट सर्जरी का खर्च उठाएगी सरकार, स्वास्थ्य मंत्री बोले- पैसों की कमी से नहीं रुकेगा इलाज

    September 21, 2026

    Johar Live Exclusive : FRO परीक्षा घोटाला : सीआईडी और एफएसएल की जांच में खुलासा, एफआरओ की परीक्षा में धांधली की हुई पुष्टि

    September 21, 2026

    बिहार : जमुई घटना पर मंत्री श्रेयसी सिंह बोलीं- समाज को शर्मसार करने वाली घटना, JDU ने बताया छिटपुट मामला

    September 21, 2026

    रांची में सजेगा बिजनेस का सबसे बड़ा मेला : मोरहाबादी में भूमि पूजन के साथ ‘एक्सपो उत्सव 2026’ की तैयारियां शुरू

    September 21, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.