सौरभ
झारखंड देश के उन राज्यों में शामिल है, जिसकी धरती खनिज संपदा के अकूत भंडार से समृद्ध है. कोयला, लौह अयस्क, यूरेनियम, अभ्रक सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिजों ने दशकों से देश के औद्योगिकीकरण और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. झारखंड की खनिज संपदा न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
बावजूद इसके, राज्य निर्माण के बाद निवेश लाने, उसे बढ़ाने और तरक्की के विभिन्न पैरामीटर में देश के अग्रणी राज्यों में अब तक शामिल नहीं हो पाया है. हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक के बाद एक बार फिर झारखंड के औद्योगिक वातावरण के निर्माण को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज है. आखिर इसकी दशा और दिशा क्या हो. चर्चाओं के बीच हम पड़ताल कर रहे हैं अब तक के निवेश, निवेश के बाद की स्थिति, निवेश के आने की संभावनाओं के बीच उसकी चुनौतियों की.
झारखंड देश के सर्वाधिक खनिज संपदा वाले राज्यों में शामिल है. देश के कुल कोयला और लिग्नाइट उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी 18.4 प्रतिशत है. लौह अयस्क जैसे धातु खनिजों के उत्पादन में भी झारखंड की बड़ी भूमिका है. जमशेदपुर, बोकारो और धनबाद जैसे पुराने औद्योगिक शहर होने के बावजूद राज्य निवेशकों की पहली पसंद नहीं बन सका है.
नीति आयोग के Investment Friendliness Index 2026 में झारखंड को 100 में से 41.3 अंक मिले हैं. देश के 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में झारखंड 25वें स्थान पर है. वहीं, 17 बड़े राज्यों में इसका स्थान 16वां है. इस सूची में केवल बिहार का स्कोर झारखंड से कम है.
नीति आयोग ने झारखंड को ‘Emerging Performer’ यानी निवेश के क्षेत्र में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे राज्यों की श्रेणी में रखा है. बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, नगालैंड और पुडुचेरी भी इसी श्रेणी में हैं. इसके विपरीत गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा और गोवा को सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों में रखा गया है.

केवल MoU की संख्या से तय नहीं होती रैंकिंग
Investment Friendliness Index केवल इस आधार पर तैयार नहीं किया गया कि किसी राज्य ने कितने निवेश समझौते किए. इसमें सड़क, बिजली, जमीन, बैंकिंग सुविधा, सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया, प्रशासनिक सहयोग, उद्योगों के लिए उपलब्ध संसाधन और निवेशकों के अनुभव को भी शामिल किया गया है.
रिपोर्ट में 84 अलग-अलग बिंदुओं पर राज्यों का आकलन किया गया. सरकारी आंकड़ों के साथ निवेशकों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों की राय भी ली गई. इस तरह झारखंड का 41.3 स्कोर राज्य में उपलब्ध सुविधाओं, सरकारी व्यवस्था और निवेशकों के अनुभव की साझा तस्वीर पेश करता है.
खनिजों में मजबूत, विदेशी निवेश में कमजोर
प्राकृतिक संसाधन झारखंड की सबसे बड़ी ताकत हैं. वित्त वर्ष 2023-24 में देश के कुल कोयला और लिग्नाइट उत्पादन में झारखंड की हिस्सेदारी 18.4 प्रतिशत थी. इस मामले में राज्य देश में तीसरे स्थान पर रहा. धातु वाले खनिजों के उत्पादन मूल्य में झारखंड की हिस्सेदारी पांच प्रतिशत थी और राज्य पांचवें स्थान पर था.
विदेशी निवेश की तस्वीर इसके बिल्कुल उलट है. रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में झारखंड में केवल 0.06 मिलियन डॉलर यानी करीब 60 हजार डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया.
इसकी तुलना में महाराष्ट्र में 15.1 अरब डॉलर, गुजरात में 7.3 अरब डॉलर, तेलंगाना में करीब तीन अरब डॉलर और तमिलनाडु में 2.4 अरब डॉलर का विदेशी निवेश दर्ज किया गया. इस मामले में झारखंड 17 बड़े राज्यों में 14वें स्थान पर रहा.
झारखंड की अर्थव्यवस्था में उद्योगों का योगदान कम नहीं है. वित्त वर्ष 2022-23 में राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योगों की हिस्सेदारी 44.7 प्रतिशत थी. हालांकि, इसका बड़ा भाग खनन, कोयला, लोहा-इस्पात, कोक और पेट्रोलियम से जुड़े उद्योगों से आता है. आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, मशीन निर्माण और आधुनिक तकनीक से जुड़े उद्योगों की मौजूदगी अभी सीमित है.
साथ बने राज्य झारखंड से आगे
झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड नवंबर 2000 में अलग राज्य बने थे. तेलंगाना का गठन जून 2014 में हुआ. इसके बावजूद Investment Friendliness Index में इन तीनों राज्यों का स्कोर झारखंड से बेहतर है.
- उत्तराखंड: 47.5 अंक
- छत्तीसगढ़: 47.5 अंक
- तेलंगाना: 47.3 अंक
- झारखंड: 41.3 अंक
छत्तीसगढ़ और झारखंड दोनों खनिज संपदा वाले राज्य हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ का स्कोर झारखंड से 6.2 अंक अधिक है. तेलंगाना में जमीन, बिजली, सरकारी मंजूरी, आईटी, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टार्टअप का मजबूत आधार बना है. उत्तराखंड ने दवा, वाहन, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे उद्योगों का विस्तार किया है.
पड़ोसी ओडिशा 52.4 अंकों के साथ देश के पांच सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल है. इससे स्पष्ट है कि केवल खनिज संपदा की उपलब्धता किसी राज्य को निवेशकों की पसंद नहीं बनाती. निवेश आकर्षित करने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा, सरल सरकारी प्रक्रिया और उद्योगों के अनुकूल वातावरण भी आवश्यक है.
अगले भाग में: पिछले 25 वर्षों में झारखंड ने कितने निवेश समझौते किए और Momentum Jharkhand के 3.39 लाख करोड़ के प्रस्तावों का क्या हुआ?
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