आनंद दत्त
रांची : सीआइडी और एफएसल की जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्प्ष्ट हो गया है कि एफआरओ की परीक्षा में धांधली कर छात्रों को पास कराया गया था. सीआईडी ने मामले में टीडीपीएल के कर्मी रक्षक सिंह की भूमिका पर करीब- करीब जांच पूरी कर ली है. जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण तथ्य इसकी भूमिका और इसके मोबाइल की एफएसएल जांच से हुआ है.
सीआईडी की जांच में आये तथ्यों के अनुसार रक्षक सिंह सिर्फ परीक्षा का लाभ लेने वाला अभ्यर्थी नहीं था, बल्कि कथित तौर पर परीक्षा में हेरफेर के पूरे तंत्र से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था. जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से एफआरओ परीक्षा की ओएमआर कार्बन कॉपी की तस्वीर और एफआरओ मुख्य परीक्षा की प्रश्नपत्र/उत्तरपुस्तिका को स्ट्रॉन्ग रूम से निकाले जाने का वीडियो सीआईडी ने बरामद किया था. बरामद दस्तावेज का सीआईडी के दौरान एफएसल से जांच करवाकर रिपोर्ट हासिल कर लिया गया है, जिसके आधार पर भी धांधली की पुष्टि हुई है.
मोबाइल में मिली OMR की तस्वीर, 31 सवालों के जवाब
सीआईडी को टीडीपीएल परिसर की तलाशी के दौरान रक्षक सिंह का बताया जा रहा एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था. इस मोबाइल में उसके एफआरओ पीटी परीक्षा से संबंधित ओएमआर कार्बन कॉपी/कैंडिडेट कॉपी की तस्वीर मिली थी. इस OMR में 31 प्रश्नों के उत्तर दर्ज थे. जांच के दौरान मोबाइल में मिली कार्बन कॉपी की तस्वीर और टीडीपीएल के सर्वर से बरामद मूल ओएमआर की फोरेंसिक/वैज्ञानिक तरीके से तुलना कराई गई.
सीआईडी ने जांच में दावा किया है कि दोनों में उत्तरों का महत्वपूर्ण मिलान पाया गया. सीआईडी को जांच में इस बात की भी आशंका है कि कार्बन कॉपी का इस्तेमाल कथित तौर पर परीक्षा में ओएमआर से छेड़छाड़ या हेरफेर की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए किया गया.
टीडीपीएल के डॉयरेक्टर के कहने पर परीक्षा में हुआ था शामिल
सीआईडी ने रक्षक सिंह के बयान को केस डायरी में भी रिकॉर्ड किया है. उसने अपने बयान में बताया कि रंबीर सिंह और सत्यपाल सिंह के कहने पर में एफआरओ पीटी परीक्षा में शामिल हुआ था. उसे कथित तौर पर चयन का भरोसा दिया गया था.
सीआईडी की जांच में आये तथ्यों के मुताबिक, उसे यह निर्देश दिया गया था कि जिन सवालों के जवाब उसे आते हैं, केवल उन्हीं को हल करे और बाकी सवाल खाली छोड़ दे. इसके बाद उसने अपनी ओएमआर कार्बन कॉपी रंबीर सिंह को दे दी.
टीडीपीएल ऑफिस में ओएमआर भरने का वीडियो बनाने का दावा
सीआईडी की जांच में आये तथ्यों के मुताबिक रक्षक सिंह ने कथित तौर पर बताया है कि एफआरओ पीटी की ओएमआर शीट टीडीपीएल के कार्यालय में प्रदीप सिंह और दो अन्य लोगों ने भरी थी. रक्षक सिंह ने इसका वीडियो अपने मोबाइल फोन से बनाने की बात भी कथित तौर पर कही है. रक्षक सिंह ने एफआरओ पीटी परीक्षा पास की.
इसके बाद उसने एफआरओ मेंस परीक्षा दी. परीक्षा के बाद उसकी खाली उत्तरपुस्तिका, जिस पर बारकोड लगा था, उसे TDPL स्थित आवास पर सत्यपाल सिंह ने उपलब्ध कराई. रक्षक सिंह ने कथित तौर पर उस उत्तरपुस्तिका को वापस किया, जिसमें उसने बाद में जवाब लिखे थे.
परीक्षा पास होने के लिए किया था चैटजीपीटी का इस्तेमाल
सीआईडी की जांच में आये तथ्यों के अनुसार आरोपी ने उत्तर लिखने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया. यानी जांच एजेंसी का दावा है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद कथित तौर पर उत्तरपुस्तिका उसके पास पहुंची और उसने उसमें जवाब भरकर उसे वापस कर दिया.
स्ट्रॉन्ग रूम से उत्तरपुस्तिका निकालने का वीडियो भी मिला
सीआईडी की जांच और वीडियोग्राफी के साथ विश्लेषण किया गया, तो रक्षक सिंह के मोबाइल फोन में एक और महत्वपूर्ण वीडियो मिला. सीआईडी के अनुसार वीडियो में एफआरओ मुख्य परीक्षा की प्रश्नपत्र/उत्तरपुस्तिका को स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकाले जाने की गतिविधि दिखाई देती है.
तीन सफल अभ्यर्थियों से संपर्क का भी दावा
सीआईडी ने ने रक्षक सिंह की भूमिका को केवल उसके अपने परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं माना है. सीआईडी को मोबाइल के सीडीआर के विशलेषण से रक्षक सिंह का संपर्क तीन सफल अभ्यर्थियों से सामने आया है. सीआईडी को जांच के दौरान इस बिंदु पर आशंका है कि रक्षक सिंह की भूमिका सिर्फ अपने चयन तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह कथित तौर पर परीक्षा में अनुचित लाभ लेने वाले अन्य अभ्यर्थियों से जुड़े नेटवर्क का भी हिस्सा हो सकता है.

