Ranchi : झारखंड के बीआईटी मेसरा में 6 मार्च से तीन दिन तक एक विशेष राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन होने जा रहा है। इस कार्यक्रम का शीर्षक है “रूट्स टू रेनैसां: झारखंड की जनजातीय विरासत, नवाचार और डिजिटल उद्यमिता का समंवय”, जिसमें कला, संस्कृति, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और सतत उद्यमिता पर चर्चा की जाएगी। यह कार्यक्रम 6 मार्च से 8 मार्च तक चलेगा और इसे बीआईटी मेसरा के प्रबंधन अध्ययन विभाग और मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में प्रमुख विषय और कार्यशालाएं
कॉन्फ्रेंस में झारखंड की जनजातीय विरासत और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें विभिन्न विद्वान, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और उद्यमी भाग लेंगे। चर्चा का मुख्य फोकस यह होगा कि मौखिक कहानी कहने की परंपरा, हस्तशिल्प और अन्य सांस्कृतिक धरोहरों को डिजिटल माध्यमों से कैसे संरक्षित और सुरक्षित किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान डिजिटल उपकरणों की मदद से लोककथाओं, बोलियों और पारंपरिक संगीत का दस्तावेजीकरण कैसे किया जा सकता है, इस पर भी सत्र आयोजित होंगे।
मुख्य अतिथि और उद्घाटन
इस राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना और झारखंड सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक आसिफ एकराम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रबंधन अध्ययन विभाग के अध्यक्ष संजय कुमार झा उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।
सांस्कृतिक प्रदर्शन और कार्यशालाएं
कार्यक्रम में झारखंड की सांस्कृतिक छटा भी देखने को मिलेगी। इसमें छऊ नृत्य, पैका नृत्य और विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने की कला, मोटे अनाज आधारित पारंपरिक खाद्य प्रणालियों पर चर्चा, और मौखिक इतिहास को सुरक्षित रखने की कार्यशालाएं भी आयोजित होंगी। कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य झारखंड की धरोहर और संस्कृति को डिजिटल युग में संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
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