आइसा (AISA) के तीन छात्र नेताओं ने अपना अनशन तोड़ा. शबाना आजमी, मनोज झा, राजा राम अमराम और प्रकाश राज की उपस्थिति में जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया. तीनों छात्र सोनम वांगचुक के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 23 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे.
अनशन समाप्त करने वाले छात्र नेताओं में नेहा बोरा, मनीष कुमार और अमीन अमितोज शामिल हैं. तीनों ने कहा कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब आंदोलन दूसरे चरण में आगे बढ़ेगा. लंबे समय से भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत पर असर पड़ रहा था और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे थे.

निगाहें सोनम वांगचुक पर
हालांकि, सभी की निगाहें अब सोनम वांगचुक पर टिकी हैं. वांगचुक फिलहाल अपना अनशन जारी रखे हुए हैं. उन्होंने संकेत दिया है कि सरकार या राजनीतिक नेतृत्व की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे.
वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं. स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें 18 जुलाई को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां चिकित्सकीय निगरानी में उनका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत स्थिर है, लेकिन लंबे उपवास के कारण वे काफी कमजोर हो गए हैं.
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल के डायरेक्टर को पत्र लिखकर अस्पताल से जाने की अनुमति मांगी है. उन्होंने कहा कि उनकी स्थिति ठीक है.
इस बीच आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है. विभिन्न विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वांगचुक की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की है. आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा.
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