Ranchi : रांची नगर निगम चुनाव अब बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सात दिन बाद प्रचार का शोर थम जाएगा और 23 फरवरी को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे। इस बार जिला प्रशासन ने साफ लक्ष्य तय किया है—कम से कम 60 प्रतिशत मतदान। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि राह आसान नहीं है। राज्य गठन के 25 सालों में सबसे ज्यादा 41.55% वोटिंग 2018 में हुई थी। उससे पहले 2008 में हुए चुनाव में तो उससे भी सिर्फ 0.5 प्रतिशत कम मतदान हुआ था। यानी शुरुआती उत्साह के बावजूद वोटिंग कभी 42% के पार नहीं जा सकी।
घर-घर पहुंचेगी वोटर स्लिप
53 वार्डों के करीब 10.27 लाख मतदाताओं तक वोटर स्लिप पहुंचाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सभी बीएलओ को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में हर घर तक मतदाता सूची पहुंचाएं। शनिवार से यह अभियान और तेज होगा। हालांकि इस बार मतदान केंद्रों के विखंडन की वजह से बड़े पैमाने पर वार्ड बदले गए हैं। यही बात प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
मतदान बढ़ाने में सामने आ रही ये बड़ी चुनौतियां
वार्ड स्कैनिंग में गड़बड़ी : मतदान केंद्रों के विखंडन के दौरान जमीनी स्तर पर वार्डों की ठीक से स्कैनिंग नहीं हुई। नतीजा यह हुआ कि मतदाता सूची में कई गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। अब सुधार की गुंजाइश भी बहुत कम है।
50 हजार युवा नहीं दे पाएंगे वोट : यह चुनाव 2024 के विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के आधार पर हो रहा है। यानी जो युवा अब 18 साल के हो चुके हैं, उनका नाम सूची में शामिल नहीं हो पाया। अनुमान है कि 50 हजार से ज्यादा युवा इस बार वोट नहीं दे पाएंगे।
बैलेट पेपर से होगा चुनाव : इस बार ईवीएम नहीं, बल्कि बैलेट पेपर से वोटिंग होगी। एक बूथ पर करीब 1500 मतदाता हैं। बैलेट से मतदान में ज्यादा समय लग सकता है। इससे कतारें लंबी होंगी और मतदाताओं का उत्साह कम पड़ सकता है।
35 वार्डों में बदले वोटरों के क्षेत्र : करीब 35 वार्डों के मतदाताओं का वार्ड बदल गया है। कई लोग अभी तक अपना नया वार्ड और बूथ खोज रहे हैं। अगर लोगों को जानकारी नहीं मिली तो वे वोट देने से वंचित रह सकते हैं।
सोसाइटी स्तर पर अभियान नहीं : विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तरह इस बार सोसाइटी स्तर पर मतदाताओं को घर से निकालने का बड़ा अभियान नजर नहीं आ रहा है। इससे भी मतदान प्रतिशत प्रभावित हो सकता है।
“रांची को बदलना है” – संजय सेठ
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची सांसद संजय सेठ ने लोगों से अपील की है कि वे शहर को बदलने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि जैसे इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहरों में लगातार पहला स्थान हासिल करता है, उसी तरह रांची को भी 2026 तक साफ-सुथरा शहर बनाना है। उनका कहना है कि यह तभी संभव है जब लोग घर से निकलें और निकाय चुनाव में मतदान जरूर करें।
मॉडल बूथ और सेल्फी प्वाइंट से मतदाताओं को लुभाने की तैयारी
मोरहाबादी स्थित रेड क्रॉस परिसर के नौ मतदान केंद्रों को इस बार मॉडल बूथ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन बूथों पर विशेष साज-सज्जा की जाएगी और मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए सेल्फी प्वाइंट भी बनाए जाएंगे, ताकि लोग मतदान के बाद अपनी भागीदारी को साझा कर सकें।
मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रत्येक मतदान केंद्र पर सबसे पहले वोट डालने वाले व्यक्ति को ‘फर्स्ट वोटर’ सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही मतदान करने वाले नागरिकों को होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग सेंटर में विशेष छूट देने की योजना भी तैयार की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग घरों से निकलकर मतदान केंद्र तक पहुंचें।
प्रशासन की ओर से सभी बूथों पर साफ-सफाई, बिजली और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैंप और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
“एक भी घर नहीं छूटेगा” – मंजूनाथ भजंत्री
डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने साफ कहा है कि रांची और बुंडू नगर निगम क्षेत्र के सभी मतदाताओं तक वोटर स्लिप पहुंचाई जाएगी। एक भी घर नहीं छोड़ा जाएगा। मॉडल बूथ बनाए जाएंगे और हर बूथ पर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
अब गेंद मतदाताओं के पाले में
प्रशासन ने अपनी तरफ से तैयारी तेज कर दी है। लेकिन असली परीक्षा मतदान वाले दिन होगी। अगर वार्ड बदलने से नाराज लोग घर में ही बैठे रह गए, तो 60 प्रतिशत का लक्ष्य पाना मुश्किल हो जाएगा। अब देखना यह है कि इस बार रांची के मतदाता इतिहास बदलते हैं या फिर पिछली बार की तरह 40 प्रतिशत के आसपास ही सिमट जाते हैं।
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