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    Home»देश»सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय को दी तीन नए कानूनों की याचिकाओं की प्राथमिकता से सुनवाई की जिम्मेदारी…
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    सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय को दी तीन नए कानूनों की याचिकाओं की प्राथमिकता से सुनवाई की जिम्मेदारी…

    Team JoharBy Team JoharAugust 29, 2025No Comments2 Mins Read0
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    Johar Live Desk: सुप्रीम कोर्ट ने तीन नए आपराधिक कानूनों – भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम – को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सीधे अपने पास ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया है। इसके बजाय, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट से इन याचिकाओं की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने को कहा है।

    जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह निर्देश फेडरेशन ऑफ बार एसोसिएशन्स ऑफ तमिलनाडु एवं पुडुचेरी की याचिका पर दिया। एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में लंबित इन तीन कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर सुनवाई करने की मांग की थी।

    आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की संवैधानिक वैधता से संबंधित प्रकृति को देखते हुए, हाईकोर्ट की राय का लाभ उठाना महत्वपूर्ण है। अदालत ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे मामले को एक डिवीजन बेंच के सामने रखें और याचिकाओं की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करें।

    सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि उच्च न्यायालय ने याचिकाओं पर सितंबर 2024 में नोटिस जारी किया था और उन्हें जुलाई 2025 में सूचीबद्ध किया गया, लेकिन अब तक सुनवाई की कोई निश्चित तारीख नहीं तय हुई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानूनों के नाम की जटिलता के कारण उन्हें मुश्किल हो रही है।

    याचिकाकर्ताओं ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि इसी तरह की याचिकाएं पहले से शीर्ष अदालत में लंबित हैं। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह उच्च न्यायालय की राय का लाभ उठाना चाहती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी में कहा: “यह संवैधानिक वैधता का मामला है। हमें हाईकोर्ट की राय का लाभ मिलेगा। यह उन उच्च न्यायालयों में से एक है, जहां हम आमतौर पर उनकी राय का इंतजार करते हैं।”

    दिलचस्प यह है कि हाईकोर्ट ने पिछले साल टिप्पणी की थी कि तीन नए आपराधिक कानूनों के नामकरण ने कुछ अराजकता पैदा कर दी है, भले ही इन कानूनों को बनाने का उद्देश्य अच्छा रहा हो।

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