Ranchi : विधानसभा बजट सत्र के सातवें दिन गुरुवार को सदन का माहौल उस वक्त गरमा गया, जब सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में कथित अनियमितताओं और बढ़े हुए खर्च का मुद्दा उठाया गया। सवाल सीधा था कि 4.88 करोड़ रुपये के काम का मामला आखिर 130 करोड़ रुपये तक कैसे पहुंच गया। विधायक राज सिन्हा ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार अक्सर पैसों की कमी और केंद्र से सहयोग नहीं मिलने की बात करती है, लेकिन यहां तो प्राक्कलन से कई गुना ज्यादा भुगतान का आदेश हो गया। उन्होंने इसे गंभीर वित्तीय लापरवाही बताया।
4.88 करोड़ से 130 करोड़ तक का सफर
मामला वर्ष 2012 का है। सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना की मरम्मत का काम भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानी भेल को दिया गया था। परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर ने दोनों इकाइयों की मरम्मत के लिए 4.88 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार किया था। लेकिन 2 मार्च 2012 को तत्कालीन मुख्य अभियंता ने 20.87 करोड़ रुपये के खर्च की कार्यदिश जारी कर दी। आगे चलकर भुगतान को लेकर विवाद हुआ और मामला अदालत पहुंच गया। 9 अक्टूबर 2023 को रांची के कमर्शियल कोर्ट ने झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड के खिलाफ आदेश देते हुए भेल को ब्याज सहित करीब 130 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी राहत नहीं
इस आदेश के खिलाफ पहले हाईकोर्ट में अपील दायर की गई, फिर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी भी दाखिल की गई। दोनों जगह से राहत नहीं मिली। इसके बाद जेयूयूएनएल ने हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। उधर भेल ने आदेश के पालन के लिए कमर्शियल कोर्ट में केस नंबर 05/2024 दायर कर संपत्ति कुर्की की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को तय है।
सीबीआई जांच और विभागीय कार्रवाई
प्रभारी मंत्री योगेंद्र महतो ने सदन को बताया कि इस मामले में सीबीआई ने 2016 में केस दर्ज किया था और मामला रांची की सीबीआई कोर्ट में चल रहा है। जांच में भेल के तीन और जेयूवीएनएल के चार अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। वित्त सचिव की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड के चार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। मंत्री ने कहा कि जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
कोडरमा में स्पंज आयरन फैक्ट्री पर भी उठा सवाल
सदन में कोडरमा की विधायक नीरा यादव ने एक और स्थानीय मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कोडरमा रेलवे स्टेशन के पास चल रही स्पंज आयरन फैक्ट्री से फैल रहे प्रदूषण पर चिंता जताई।
घनी आबादी के बीच फैक्ट्री पर आपत्ति
विधायक ने कहा कि रेलवे स्टेशन और नेशनल हाईवे के पास स्थित इस फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं आसपास के लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। उनका कहना था कि उद्योग विभाग की ओर से जो जवाब मिला है, वह संतोषजनक नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गलत जानकारी दी है।
जांच कमेटी बनी, नई कमेटी का भी संकेत
इस पर मंत्री संजय यादव ने कहा कि फैक्ट्री की घनी आबादी से दूरी की जांच के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बना दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सदन रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ तो नई कमेटी भी बनाई जा सकती है। नीरा यादव ने साफ कहा कि गलत जानकारी देना गंभीर बात है और अगर किसी अधिकारी ने ऐसा किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस मुद्दे पर सदन में कुछ देर तक बहस चली, जिसके बाद सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
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