Deoghar : देवघर में महाशिवरात्रि से पहले बाबा बैद्यनाथ और मां पार्वती मंदिरों की प्राचीन परंपरा निभाई गई। शुक्रवार को दोनों मंदिरों के शिखर से पंचशूल उतारे गए। यह परंपरा हर साल महाशिवरात्रि से एक-दो दिन पहले की जाती है। इस बार भी श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी रही।
भंडारी परिवार की देखरेख में हुआ पंचशूल उतारना
दोपहर में भंडारी परिवार की देखरेख में भंडारियों की टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचशूलों को मंदिर के शिखर से नीचे उतारा। इसके बाद दोनों पंचशूलों का पारंपरिक मिलन कराया गया। श्रद्धालु पंचशूलों को स्पर्श कर आशीर्वाद लेने लगे और जयकारे लगाते रहे।
भक्तों की भीड़ उमड़ी, पंचशूलों को किया नमन
इस दौरान भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी। लोगों ने सिर सटाकर पंचशूलों को नमन किया और बाबा बैद्यनाथ व मां पार्वती का आशीर्वाद लिया। पंचशूलों की पूजा लगभग एक घंटे तक चलेगी। बैद्यनाथ मंदिर के मुख्य प्रबंधक रमेश परिहस्त ने बताया कि शनिवार को मंदिर कार्यालय स्थित राधाकृष्ण मंदिर के बरामदे में सभी मंदिरों से उतारे गए पंचशूलों की तांत्रिक विधि से विशेष पूजा की जाएगी। पूजा के बाद आरती होगी और फिर पंचशूलों को पुनः शिखर पर स्थापित किया जाएगा।
पवित्र गठबंधन खोला गया
इस अवसर पर बैद्यनाथ मंदिर के सरदार पंडा गुलाबनंद ओझा ने भी पंचशूलों का नमन किया। पंचशूल उतारने के साथ ही बाबा बैद्यनाथ और मां पार्वती मंदिर के बीच स्थापित पवित्र गठबंधन को भी खोला गया। यह गठबंधन अखंड सुहाग का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु गठबंधन का धागा पाने के लिए उत्साहित रहे। परंपरा के अनुसार, पंचशूलों के पुनः शिखर पर स्थापित होने के बाद मंदिर इस्टेट द्वारा गठबंधन की शुरुआत फिर से की जाएगी।
श्रद्धालुओं का उल्लास और मंदिर का माहौल
मंदिर परिसर में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। पंचशूलों के स्पर्श और मिलन के दौरान जयकारों और मंत्रोच्चारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने इस परंपरा में भाग लेकर बाबा बैद्यनाथ और मां पार्वती के आशीर्वाद का अनुभव लिया।
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