New Delhi : सरकार आज यानी गुरुवार को अपना आर्थिक सर्वे (Economic Survey) पेश करेगी। इसे देश की अर्थव्यवस्था का सालाना ‘रिपोर्ट कार्ड’ माना जाता है। इस सर्वे में बताया जाएगा कि पिछले एक साल में महंगाई, खेती-किसानी, नौकरियों और निवेश पर क्या असर पड़ा। इसके अलावा यह संकेत भी देगा कि आने वाले साल में आम लोगों और कारोबारियों के लिए क्या बदलाव हो सकते हैं।
आर्थिक सर्वे में ये छह बड़ी बातें रहेंगी नजर :
महंगाई : दाल, तेल और सब्जियों की कीमतों में वृद्धि की वजह क्या रही और क्या आने वाले महीनों में आम लोगों को राहत मिल पाएगी।
GDP : भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी रहेगी या नहीं। GDP बढ़ने का मतलब होता है नए निवेश और कारोबार में बढ़ोतरी।
नौकरी : IT, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में रोजगार की स्थिति। कौन से सेक्टर में नौकरियां बढ़ी और किस सेक्टर में छंटनी का खतरा है।
खेती-किसानी : देश की आधी आबादी खेती पर निर्भर है। सर्वे में कृषि की विकास दर और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार के नए कदमों की जानकारी दी जाएगी।
सरकारी कर्ज : सरकार की आमदनी और खर्च का अंतर यानी राजकोषीय घाटा। घाटा कम होने का मतलब है मजबूत अर्थव्यवस्था और कम महंगाई।
विदेशी मुद्रा भंडार : वैश्विक मंदी के बीच भारत के पास कितनी विदेशी मुद्रा है। भंडार ज्यादा होने से रुपया मजबूत रहता है।
आर्थिक सर्वे क्या है?
आर्थिक सर्वे देश की आर्थिक स्थिति का सालाना रिपोर्ट कार्ड है। इसमें पिछले साल का पूरा हिसाब-किताब और आने वाले साल के लिए सुझाव, चुनौतियां और समाधान शामिल होते हैं। यह सर्वे आमतौर पर बजट से एक दिन पहले संसद में पेश किया जाता है।
इसे कौन तैयार करता है?
वित्त मंत्रालय के इकोनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट की इकोनॉमिक डिवीजन हर साल यह सर्वे तैयार करती है। इसका नेतृत्व चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) करते हैं। वर्तमान में इस पद पर डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन हैं।
क्यों जरूरी है?
इकोनॉमिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति बताने का सबसे बड़ा साधन है। यह सरकार को सुधार के उपाय सुझाता है। हालांकि, सरकार इसके सुझावों को मानने के लिए बाध्य नहीं होती, लेकिन आम तौर पर बजट इसी के आधार पर तैयार किया जाता है।
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