Ranchi : ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए रांची जिले के सभी 323 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) का कायाकल्प करने की तैयारी शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग अब इन केंद्रों को सिर्फ नाम का हेल्थ सेंटर नहीं, बल्कि गांवों का “फर्स्ट हेल्थ प्वाइंट” बनाना चाहता है, ताकि लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए शहर या सदर अस्पताल का चक्कर न लगाना पड़े। नई व्यवस्था के तहत इन केंद्रों पर दवाइयों की उपलब्धता, मुफ्त पैथोलॉजी जांच, टेली-कंसल्टेशन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और प्राथमिक इलाज की आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग का मकसद है कि पंचायत स्तर पर ही मरीजों को बुनियादी इलाज मिल जाए, ताकि समय और पैसे दोनों की बचत हो सके। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
आठ टीमों को मिली जिम्मेदारी
रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थिति का आकलन करने और कमियों की पहचान के लिए सदर अस्पताल की आठ टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर रही हैं। वहां डॉक्टरों की उपलब्धता, दवा सप्लाई, लैब सुविधा, इंटरनेट कनेक्टिविटी और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की जांच की जा रही है। वहीं प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी (एमओआईसी) भी लगातार मॉनिटरिंग कर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
कई केंद्रों में डॉक्टर और संसाधनों की कमी
जिले के कई आयुष्मान आरोग्य मंदिर अभी भी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। कई जगह डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। कुछ केंद्रों में नियमित पैथोलॉजी जांच नहीं हो पा रही है, तो कहीं कमजोर इंटरनेट की वजह से टेली-मेडिसिन सेवा प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों की शिकायत है कि कई केंद्रों में सिर्फ बोर्ड लगा हुआ है, लेकिन नियमित स्वास्थ्य सेवा नहीं मिलती। कई बार जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध नहीं रहतीं, जिसके कारण मरीजों को मजबूर होकर निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता है।
अब ऑनलाइन मिलेगी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह
स्वास्थ्य विभाग अब इन केंद्रों को डिजिटल हेल्थ सिस्टम से जोड़ने की तैयारी में है। टेली-कंसल्टेशन सुविधा शुरू होने के बाद गांव के मरीज विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन सलाह ले सकेंगे। इससे दूरदराज के इलाकों के लोगों को बार-बार रांची या बड़े अस्पताल जाने की जरूरत कम होगी। खासकर शुगर, ब्लड प्रेशर, टीबी और मानसिक तनाव जैसी बीमारियों के मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
100 केंद्रों को एनक्वास अवार्ड के लिए चुना गया
रांची जिले के 100 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का चयन राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक यानी एनक्वास प्रमाणन के लिए किया गया है। इसकी सूची स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है। अगर ये केंद्र सभी मानकों पर खरे उतरते हैं, तो रांची ऐसा पहला जिला बन सकता है जहां इतने बड़े स्तर पर आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को गुणवत्ता प्रमाणन मिलेगा। इससे पहले रांची सदर अस्पताल को यह सम्मान मिल चुका है।
क्या है एनक्वास प्रमाणन
एनक्वास यानी नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड केंद्र सरकार की गुणवत्ता जांच प्रणाली है। इसके तहत अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें साफ-सफाई, मरीज सुरक्षा, दवा उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ, रिकॉर्ड प्रबंधन, लैब सुविधा और इलाज की गुणवत्ता जैसे कई मानकों की जांच होती है। प्रमाणन मिलने के बाद केंद्रों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि और विशेष पहचान भी मिलती है।
गांवों में बढ़ रहा गंभीर बीमारियों का खतरा
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब गांवों में सिर्फ बुखार, सर्दी-खांसी या प्रसव संबंधी समस्याएं ही नहीं, बल्कि मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, टीबी और मानसिक तनाव जैसी बीमारियों के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं। जिले के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में हर महीने करीब 1.5 से 2 लाख मरीज इलाज और सलाह के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है जिन्हें नियमित जांच और दवा की जरूरत पड़ती है।
अब गांवों में ही मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
विभागीय रिपोर्ट में सामने आया है कि कई पंचायतों में लोगों को सामान्य जांच के लिए भी 20 से 30 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल जाना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है और इलाज में देरी भी होती है। इसी को देखते हुए अब आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को पूरी तरह विकसित करने की योजना पर जोर दिया जा रहा है। यहां ब्लड प्रेशर, शुगर टेस्ट, गर्भावस्था जांच, टीबी स्क्रीनिंग, कैंसर की शुरुआती जांच और टेली-मेडिसिन जैसी सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, ताकि गांव स्तर पर ही लोगों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके।
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