New Delhi : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि देश में ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में कहा कि नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और राज्यों की पुलिस ऐसे मामलों की सक्रिय रूप से जांच कर रही है, जिसके चलते कई गिरफ्तारियां हुई हैं और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट व सजा भी दी गई है।
नित्यानंद राय ने बताया कि NIA और राज्य ATS के बीच सुरक्षित डेटा शेयरिंग को आसान बनाने के लिए NATGRID के आईटी प्लेटफॉर्म पर ऑर्गनाइज्ड क्राइम नेटवर्क डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। वहीं अपग्रेडेड NATGRID टूल ‘गांदिवा’ कई स्रोतों से प्राप्त डाटा के विश्लेषण में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के कारण कई आतंकवादी मॉड्यूल का सफाया किया गया है, जो आतंकियों की भर्ती और फंडिंग में शामिल थे।
सरकार ने पिछले दो वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करना, एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना, ऑनलाइन कट्टरपंथ और एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग पर नियंत्रण और सीमा सुरक्षा को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना शामिल है। नित्यानंद राय ने कहा कि NIA ने नेशनल टेरर डेटाबेस फ्यूजन एंड एनालिसिस सेंटर भी बनाया है, जिसे वैज्ञानिक सबूत एकत्र करने और फोरेंसिक विश्लेषण के लिए आधुनिक तकनीक का समर्थन प्राप्त है।
उन्होंने बताया कि मल्टी-एजेंसी सेंटर (MAC) की कनेक्टिविटी को जिला स्तर तक मजबूत कर दिया गया है, जिससे ड्रग ट्रैफिकिंग, फेक करेंसी, क्रिप्टोकरेंसी, साइबर अपराध और बायो-टेररिज्म जैसे मामलों में बेहतर निगरानी और विश्लेषण संभव हो सका है। MAC नेटवर्क को अपग्रेड करके इसमें एआई और मशीन लर्निंग आधारित रियल-टाइम विश्लेषण की सुविधा जोड़ी गई है।
ऑनलाइन कट्टरपंथ रोकने के लिए आईटी एक्ट के तहत बड़ी संख्या में उग्रवादी और रेडिकल कंटेंट से जुड़े URL भी ब्लॉक किए गए हैं। साइबर पेट्रोलिंग और डिजिटल निगरानी को बढ़ाया गया है। राय ने बताया कि सीमा सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है, जिसमें ड्रोन, थर्मल इमेजर, नाइट-विज़न डिवाइस और सेंसर शामिल हैं। इससे घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई है और हथियार व नशीले पदार्थों की बरामदगी बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि फोरेंसिक जांच की क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्यों की योजनाओं पर 4800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। 25 राज्यों में फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण के लिए 233 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इन कदमों से जांच एजेंसियों को आधुनिक उपकरण, डीएनए टेस्टिंग मशीनें और मोबाइल फोरेंसिक वैन उपलब्ध हुई हैं, जिससे ऑन-साइट जांच और विश्लेषण की प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और प्रभावी हो गई है।


