कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की फंडिंग और उसके पदाधिकारियों के कथित विदेशी संपर्कों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संगठन पर भारत विरोधी ताकतों से आर्थिक मदद लेने का आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को अमेरिका में बैठे डोनर्स से फंडिंग मिल रही है, जबकि संगठन के सह-संस्थापक और प्रवक्ता आशुतोष रांका को पाकिस्तान के राजनेताओं और वहां के हैंडलर्स से आर्थिक मदद मिल रही है.
बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसे पर्याप्त सबूत और खुफिया जानकारियां मौजूद हैं, जो सीजेपी से जुड़े लोगों को देश और विदेश में सक्रिय भारत विरोधी एनजीओ और संगठनों से मिलने वाली कथित फंडिंग की ओर इशारा करती हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी फंडिंग से संचालित एनजीओ, डीप स्टेट के एजेंट और भारत विरोधी ताकतें मिलकर देश के खिलाफ गलत नैरेटिव तैयार करने में जुटी हैं. उनके मुताबिक, इस पैसे का इस्तेमाल भारत में जनमत को प्रभावित करने और सरकार के खिलाफ अभियान चलाने के लिए किया जा रहा है. इसके वर्तमान उदाहरण, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका है.
अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका की फंडिंग पर सवाल
केंद्रीय मंत्री ने अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका को स्वयंभू नेता बताते हुए उनके आर्थिक स्रोतों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं, उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि उनके अभियानों के लिए पैसा कहां से आ रहा है.
जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि खुफिया इनपुट भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाली ताकतों की भूमिका की ओर संकेत करते हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक जमीन खो चुके कुछ लोग जनता का ध्यान भटकाने और फिर से चर्चा में आने के लिए इस तरह का माहौल बना रहे हैं.
विदेशी फंडिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री ने फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) का बचाव किया. उन्होंने कहा कि विदेशी धन के जरिए देश की आंतरिक राजनीति और जनमत को प्रभावित करने की कोशिशों पर नियंत्रण के लिए ऐसे कानूनी प्रावधान जरूरी हैं.


