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    Home»झारखंड»नवजातों की जिंदगी बचाने की जंग : झारखंड में 60+ अस्पतालों में हाईटेक NBSU विस्तार
    झारखंड

    नवजातों की जिंदगी बचाने की जंग : झारखंड में 60+ अस्पतालों में हाईटेक NBSU विस्तार

    Team JoharBy Team JoharMarch 25, 2026Updated:March 25, 2026No Comments3 Mins Read5
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    Medininagar (Palamu) : झारखंड में नवजात बच्चों की मौत अब भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हर 1000 जन्म पर करीब 25 बच्चों की मौत हो रही है। हालांकि पहले के मुकाबले हालात में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी स्थिति पूरी तरह से समझदार नहीं मानी जा रही है।

    अब 60 से ज्यादा अस्पतालों में बनेगी NBSU यूनिट

    इसी चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 60 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई यानी NBSU बनाने की तैयारी है। इसके लिए सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।

    नवजातों की मौत के पीछे क्या हैं कारण

    विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर नवजातों की मौत जन्म के पहले ही हफ्ते में हो जाती है। इसके पीछे समय से पहले जन्म, कम वजन और जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं मुख्य कारण होती हैं। ऐसी स्थिति में अगर बच्चे को तुरंत सही इलाज और निगरानी मिल जाए, तो बड़ी संख्या में नवजातों की जान बचाई जा सकती है।

    लेबर रूम के पास ही होगी सुविधा

    नई NBSU यूनिट को अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड या लेबर रूम के पास ही बनाया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि जैसे ही कोई बच्चा गंभीर स्थिति में होगा, उसे तुरंत इलाज मिल सकेगा और रेफर करने में लगने वाला समय भी बचेगा।

    हर दिन सामने आ रहे गंभीर केस

    पलामू के मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (MMCH) में हर दिन औसतन 10 गंभीर नवजात इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई बार मरीज देर से पहुंचते हैं, जिससे डॉक्टरों के लिए उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है। ज्यादातर बच्चे ग्रामीण इलाकों से रेफर होकर आते हैं।

    आधुनिक मशीनों से लैस होंगी इकाइयां

    नई एनबीएसयू इकाइयों को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा, जिनमें रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन, फोटोथेरेपी यूनिट और स्पॉट लाइट शामिल हैं। इन सुविधाओं की मदद से नवजातों को तुरंत और बेहतर इलाज मिल सकेगा। इसके साथ ही संक्रमण को रोकने के लिए सख्त मानकों का पालन किया जाएगा और बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निपटान की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि बच्चों की देखभाल पूरी तरह सुरक्षित माहौल में हो सके।

    ग्रामीण अस्पतालों में अभी भी कमी

    फिलहाल कई जिलों में यह सुविधा सीमित है। जैसे पलामू में सिर्फ हुसैनाबाद और छत्तरपुर अस्पताल में NBSU है, जबकि बाकी कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है।

    उम्मीद: अब बचेगी ज्यादा जिंदगियां

    सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि नवजातों को समय पर इलाज मिलेगा और शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। अगर यह योजना सही तरीके से जमीन पर उतरी, तो हजारों बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

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