Patna : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। हालांकि अपने भाषण के दौरान तेजस्वी यादव कुछ असहज नजर आए। वे भाषण पढ़ते समय कई बार अटकते दिखे। इस दौरान उन्होंने बताया कि उनका नाखून उखड़ गया है और वे दवा लेकर आए हैं, इसलिए बैठकर बोलने की अनुमति चाहते हैं। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने उनके आग्रह को स्वीकार कर लिया।
अपने संबोधन के दौरान तेजस्वी यादव के एक बयान को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। उन्होंने महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए एक विवादित टिप्पणी का जिक्र किया, जिसके बाद एनडीए की महिला विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। इस बयान को लेकर कुछ देर तक विधानसभा में शोर-शराबा और नोकझोंक की स्थिति बनी रही।
तेजस्वी यादव ने कहा कि विधानसभा में उनका यह 11वां वर्ष है और हर साल राज्यपाल के अभिभाषण में वही बातें दोहराई जाती हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार “झूठी वाहवाही और 100 प्रतिशत लापरवाही” के सहारे चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में लोकतंत्र कमजोर हुआ है और “जनतंत्र को धनतंत्र और मशीन तंत्र में बदल दिया गया है।” तेजस्वी ने कहा कि भले ही विपक्ष की संख्या कम हो, लेकिन वह मजबूती से जनता के मुद्दे उठाता रहेगा।
सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “यहां कानून का राज और न्याय के साथ विकास नहीं, बल्कि अन्याय के साथ विनाश हो रहा है।”
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि महागठबंधन सरकार के कार्यकाल में नौकरी देने की पहल हुई और शिक्षकों की बहाली भी उसी दौर में की गई। उन्होंने कहा कि जब वे 10 लाख सरकारी नौकरियों की बात करते थे, तब मुख्यमंत्री यह पूछते थे कि पैसा कहां से आएगा, लेकिन आज वही मुद्दे सरकार के एजेंडे में शामिल हैं, फिर भी युवाओं को रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है और उन्हें लगता है कि सरकार उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। तेजस्वी ने कहा, “शासन खामोश है और सरकार मदहोश है।”
तेजस्वी यादव के इस आक्रामक भाषण से विधानसभा का राजनीतिक माहौल और गरमा गया।
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