Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में जंगलों और वन भूमि के पास चल रही पत्थर माइनिंग और स्टोन क्रशर को लेकर फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सरकार द्वारा कम की गई न्यूनतम दूरी के नियम को रद्द कर दिया है और पुराने नियम को फिर से लागू कर दिया है।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि अब वन भूमि की सीमा से 500 मीटर के अंदर स्टोन माइनिंग नहीं हो सकेगी। वहीं, स्टोन क्रशर लगाने के लिए कम से कम 400 मीटर की दूरी जरूरी होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें इस दूरी को 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि यह फैसला बिना किसी ठोस वैज्ञानिक अध्ययन के लिया गया था। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार की ओर से बनाई गई विशेषज्ञ समिति में वन और पर्यावरण के जानकारों की कमी थी। ऐसे मामलों में ‘सतर्कता का सिद्धांत’ अपनाना जरूरी है, ताकि पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभ्यारण्यों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इन क्षेत्रों के चारों ओर 1 किलोमीटर का इको सेंसिटिव जोन (ESZ) पूरी तरह लागू रहेगा। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुसार जारी रहेगी, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा जा सके। इसके अलावा कोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को बड़ा जिम्मा सौंपा है। बोर्ड को राज्य में चल रही सभी माइनिंग और स्टोन क्रशर यूनिट्स का सर्वे करना होगा। खासकर उन यूनिट्स की सूची तैयार करनी होगी, जिन्हें पहले कम दूरी के नियम के आधार पर अनुमति दी गई थी।
कोर्ट ने इस सर्वे रिपोर्ट को 1 जून 2026 तक जमा करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून को होगी। तब तक हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश लागू रहेगा।
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