रांची। झारखंड CID ने चाईबासा ट्रेजरी से जुड़े डिजिटल हेरफेर और फर्जीवाड़े के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है. यह मामला चाईबासा एसपी ऑफिस की लेखा शाखा में कथित रूप से डेटा से छेड़छाड़ कर 45 लाख रुपये से अधिक का सरकारी धन गबन करने का है.
इन चार लोगों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट:
सीआईडी द्वारा जिन चार आरोपियों के नाम चार्जशीट में दर्ज किए गए हैं, वे हैं:
देव नारायण मुर्मू (आरक्षी / कांस्टेबल)
अरुण मार्डी
सरकार हेंब्रम
गोराचंद मरांडी (फुटबॉलर)।
कैसे अंजाम दिया गया डिजिटल गबन?
सीआईडी की जांच के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के जरिए अंजाम दिया गया. वर्ष 2017 से 2025 के बीच एसपी दफ्तर के DDO (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) कोड का उपयोग कर IFMS डेटा में हेरफेर की गई. लेखा शाखा में तैनात आरक्षी देव नारायण मुर्मू ने डिजिटल क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से सरकारी धन अरुण मार्डी, सरकार हेंब्रम और फुटबॉलर गोराचंद मरांडी के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किया.
फिजिकल और डिजिटल रिकॉर्ड में अंतर: जांच अधिकारियों को भौतिक रिकॉर्ड्स (Physical Registers) और डिजिटल अभिलेखों (Digital Records) के बीच भारी भिन्नता मिली, जिसके आधार पर धोखाधड़ी, साजिश और साइबर गबन की धाराएं तय की गईं.
मामला क्या है?
चाईबासा जिला पुलिस कार्यालय की लेखा शाखा में पुलिसकर्मियों के वेतन, भत्ते और अन्य मदों के बजटीय आवंटन का प्रबंधन IFMS पोर्टल के जरिए होता है. जांच के दौरान यह बात सामने आई कि विभागीय आईडी और पासवर्ड का अनाधिकृत इस्तेमाल करके सालों से राशि को दूसरे निजी खातों में भेजा जा रहा था. आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) और फिजिकल फाइलों के मिलान के दौरान यह पकड़ में आया कि जितने बजट का डिजिटल भुगतान दिखाया गया है, उतने के आधिकारिक बिल या वाउचर फाइलों में मौजूद ही नहीं हैं. भौतिक रिकॉर्ड और डिजिटल सिस्टम के आंकड़ों में बेमेल दिखने के बाद विभागीय उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया, जिसके बाद मामले की जांच राज्य पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंपी गई थी.
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