Simdega : आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों के पुनर्वास और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर मंगलवार को सिमडेगा एसपी ऑफिस में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता एसपी श्रीकांत एस खोटरे ने की। इस दौरान जिले के कई आत्मसमर्पित नक्सली मौजूद रहे और उन्होंने अपनी विभिन्न समस्याओं तथा मांगों को प्रशासन के सामने रखा। बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिल रही सुविधाओं की जानकारी लेना और उनकी लंबित समस्याओं का समाधान करना था। पुलिस अधीक्षक ने सभी की बातें ध्यान से सुनीं और संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया।
शिक्षा और मकान किराया सहायता के लिए आवेदन लेने का निर्देश
बैठक के दौरान कई आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बच्चों की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता, मकान किराया और अन्य जरूरी सुविधाओं की मांग रखी। इस पर एसपी श्रीकांत एस खोटरे ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षा शुल्क सहायता प्राप्त करने के इच्छुक लोगों से आवेदन लेकर संबंधित विभाग को भेजा जाए ताकि उन्हें योजना का लाभ मिल सके। इसी तरह मकान किराया सहायता के लिए भी आवेदन प्राप्त कर नियमानुसार संबंधित विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया।
जमीन से जुड़े मामलों को पुनर्वास समिति के समक्ष रखा जाएगा
बैठक में जमीन और भूमि आवंटन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कई लाभुकों ने पुनर्वास के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग रखी। इस पर निर्देश दिया गया कि संबंधित लोगों से आवेदन प्राप्त कर उन्हें उपायुक्त कार्यालय भेजा जाए। इसके बाद मामलों को पुनर्वास समिति की बैठक में रखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्वरोजगार के लिए मिलेगा प्रशिक्षण
आत्मसमर्पित नक्सलियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। जानकारी दी गई कि 23 अगस्त 2026 को आरसेटी (RSETI), सिमडेगा में फास्ट फूड निर्माण और स्टॉल संचालन का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इच्छुक लाभुकों को इस प्रशिक्षण में शामिल कराया जाएगा ताकि वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें। इसके अलावा सुअर पालन में रुचि रखने वाले लाभार्थियों को आरसेटी, गुमला में आयोजित पिगरी प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षणों का उद्देश्य लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
आयुष्मान कार्ड और राशन कार्ड बनाने पर भी जोर
बैठक में स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा योजनाओं से जुड़ी सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिया कि जिन लाभार्थियों के पास आयुष्मान कार्ड और राशन कार्ड नहीं हैं, उनके आवेदन लेकर संबंधित विभाग को भेजे जाएं ताकि उन्हें जल्द से जल्द इन योजनाओं का लाभ मिल सके।
बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को बैंक और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाए। इससे वे अपना रोजगार शुरू कर सकेंगे और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगे। साथ ही पात्र आत्मसमर्पित नक्सलियों की सूची तैयार कर उन्हें विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया।
कई लाभ पहले ही दिए जा चुके हैं
बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत पात्र आत्मसमर्पित नक्सलियों को कई तरह के लाभ पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इनमें पुनर्वास लाभ, पुरस्कार राशि और गृह निर्माण के लिए चार डिसमिल जमीन शामिल है। इसके अलावा पांच आत्मसमर्पित नक्सलियों को घर बनाने के लिए निर्धारित वित्तीय सहायता राशि भी दी जा चुकी है। अन्य लाभार्थियों के मामलों में प्रक्रिया चल रही है और उन्हें भी जल्द सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यधारा में लौटने वालों को हर संभव मदद का भरोसा
एसपी श्रीकांत एस खोटरे ने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति का मकसद आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य देना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस विभाग पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापन और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। उन्होंने उपस्थित लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी से सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों और योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकें।
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