Palamu : पलामू जिले में सालों से सूखा और पानी की किल्लत बड़ी समस्या रही है। हर दूसरे साल सूखे की मार झेलने वाले इस इलाके के लिए अब सोन पाइपलाइन परियोजना उम्मीद की बड़ी किरण बनकर सामने आई है। अगर यह योजना तय समय पर और सही तरीके से जमीन पर उतरती है, तो न सिर्फ खेतों की प्यास बुझेगी बल्कि लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल भी पहुंचेगा।
सोन नदी का पानी पाइपलाइन से पहुंचेगा खेतों तक
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सोन नदी से पानी उठाकर पाइपलाइन, टनल और आधुनिक पंपिंग सिस्टम के जरिए जलाशयों और नहरों तक पहुंचाया जाएगा। पहले चरण में छतरपुर और हुसैनाबाद क्षेत्र को जोड़ा गया है। करीब 1500 एमएम व्यास की पाइपलाइन बिछाई जाएगी और इसके साथ हाईटेक पंपिंग सिस्टम व अलग ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार किया जाएगा, ताकि पानी बिना रुकावट खेतों और गांवों तक पहुंचे।
48 हजार हेक्टेयर जमीन और 2 लाख घरों को मिलेगा फायदा
इस परियोजना का लक्ष्य काफी बड़ा है। करीब 48 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा लगभग 2 लाख घरों तक पेयजल पहुंचाने की योजना है। इससे गांवों में पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है और लोगों को रोजमर्रा की जरूरत के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
96 गांवों तक पहुंचेगा पानी, लौटेगी हरियाली
इस योजना से जिले के 96 गांवों को सीधा फायदा मिलेगा। हैदरनगर, मोहम्मदगंज और हुसैनाबाद प्रखंड के कई गांवों को सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। इन गांवों में अभी तक खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। पानी पहुंचने के बाद यहां खेतों में हरियाली लौटेगी और किसानों को राहत मिलेगी।
एक फसल पर निर्भर किसान, अब बदलेगी तस्वीर
छतरपुर और हुसैनाबाद इलाके में अभी केवल 12 प्रतिशत खेतों तक ही सिंचाई सुविधा पहुंची है। इसी वजह से किसान एक ही फसल पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। इस योजना के लागू होने के बाद बहुफसली खेती का रास्ता खुलेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है और आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी।
जलाशयों को भी मिलेगा पानी
परियोजना के तहत बतरे, बटाने, जिंजोई, सिरनिया और कासीसोत जैसे जलाशयों को भी भरा जाएगा। इससे पूरे इलाके में पानी का संतुलन बेहतर होगा और सिंचाई का दायरा और बढ़ेगा। दूसरे चरण में पाटन, विश्रामपुर और मेदिनीनगर को भी इस योजना से जोड़ने की तैयारी है।
456 करोड़ की योजना, 2024 में हुआ था शिलान्यास
इस परियोजना की लागत करीब 456.63 करोड़ रुपये है। 10 फरवरी 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने इसका शिलान्यास किया था। योजना को लागू करने की जिम्मेदारी सिगमा आर.डी. कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद को दी गई है।
शुरुआत में ही विवाद के संकेत
जहां एक ओर यह योजना उम्मीद जगा रही है, वहीं दूसरी ओर शुरुआत में ही विवाद के संकेत भी मिलने लगे हैं। हुसैनाबाद को पहले चरण में शामिल किए जाने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। पूर्व मंत्री कमलेश कुमार सिंह ने साफ चेतावनी दी है कि अगर हुसैनाबाद को पहले चरण से बाहर किया गया, तो जोरदार आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि योजना में छतरपुर के साथ हुसैनाबाद को भी बराबर हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
उम्मीद और चुनौती दोनों साथ
कुल मिलाकर सोन पाइपलाइन परियोजना पलामू के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि योजना समय पर, पारदर्शी तरीके से और बिना किसी भेदभाव के लागू हो।
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