Lucknow: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर लगाने की प्रक्रिया के बाद से विभाग और उपभोक्ता दोनों ही मुश्किल में घिरे नजर आ रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक, स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद बिजली की खपत में औसतन 84 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के आंकड़ों पर गौर करें तो जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच पुराने मीटरों पर औसत मासिक खपत 118.94 यूनिट थी, जो कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद जुलाई से दिसंबर 2025 के बीच बढ़कर 219.15 यूनिट प्रति माह हो गई है।
इस असामान्य वृद्धि को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी बढ़ोतरी के पीछे का कारण क्या है। जहां एक ओर उपभोक्ता इस बढ़े हुए बिल से परेशान हैं, वहीं उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहा है। इस स्थिति के चलते राज्य बिजली उपभोक्ता परिषद ने पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल यह मामला नियामक आयोग के सामने भी उठा है, जहां बिजली विभाग ने केवल आंतरिक रिपोर्ट मंगवाने की बात कही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस तकनीकी खामी या रीडिंग में आए इस बड़े अंतर को कैसे स्पष्ट करता है।
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