Koderma : कोडरमा जिले के प्रमुख जलाशयों और डैम इन दिनों विदेशी मेहमानों से गुलजार हैं। साइबेरिया, रूस और मध्य एशिया के ठंडे इलाकों से आने वाले प्रवासी पक्षी, खासकर साइबेरियन डक, नवंबर-दिसंबर से लेकर मार्च तक यहां डेरा जमाए हुए हैं। हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर ये पक्षी जिले के डैम, तालाब और जलाशयों में पहुंचते हैं।
नीले पानी में सुनहरे रंग के इन पक्षियों के झुंड तैरते और उड़ान भरते हुए बेहद मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं। उनकी चहचहाहट से जलाशयों के आसपास का वातावरण जीवंत हो उठा है। यह दृश्य स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी खूब आकर्षित कर रहा है। कोडरमा के प्रसिद्ध तिलैया डैम के अलावा मरकच्चो प्रखंड स्थित पंचखेरो डैम प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बना हुआ है। पंचखेरो जलाशय अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहले से ही जाना जाता है, लेकिन सर्दियों में इन विदेशी पक्षियों के आगमन से इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है। जंगल और पहाड़ों के बीच स्थित यह जलाशय इन पक्षियों के कलरव से किसी उत्सव स्थल जैसा नजर आता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, साइबेरिया में कड़ाके की ठंड के कारण तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है, जिससे वहां की झीलें जम जाती हैं और भोजन की कमी हो जाती है। इसी वजह से ये पक्षी गर्म इलाकों की ओर प्रवास करते हैं। झारखंड का यह क्षेत्र इनके लिए अनुकूल साबित होता है, जहां पर्याप्त भोजन और शांत वातावरण मिलता है। साइबेरियन डक जलचर पौधों, कीटों, जलकुंभी, शैवाल और छोटी मछलियों का आहार लेते हैं। सर्दियों में यहां के जलाशय इनके लिए भोजन का अच्छा स्रोत बनते हैं। यही कारण है कि ये पक्षी मार्च तक यहां ठहरते हैं और मौसम गर्म होने पर वापस अपने मूल स्थान लौट जाते हैं।
प्रवासी पक्षियों के आगमन से पर्यटन गतिविधियों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। नौका विहार करने वाले सैलानियों की संख्या बढ़ी है और लोग इन पक्षियों को देखने व उनकी तस्वीरें लेने बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पक्षियों की मौजूदगी से क्षेत्र की पहचान एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में और मजबूत हो रही है।
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