शक्ति शर्मा ने भारतीय वायुसेना में एक नया इतिहास रचा है. करीब 32 साल की सेवा के बाद वह एयर वाइस मार्शल पहली नॉन-मेडिकल महिला अधिकारी बनी है. जो एयर वाइस मार्शल की दो-स्टार रैंक तक पहुंची है. भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी. यानि कि पहली महिला अधिकारी बनने में 94 साल लग गए. वहीं, भारत की आजादी (1947) के बाद करीब 79 साल होते हैं.
बीते 1 सितंबर 2026 को उन्होंने असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टॉफ (एडुकेशन) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली. वर्ष 1994 में वायुसेना की एडुकेशन ब्रांच से शुरू हुआ उनका सफर अब भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया है.
अपने लंबे करियर में शक्ति शर्मा ने ट्रेनिंग एस्टेब्लिशमेंट, फील्ड स्टेशन्स, कमांड हेडक्वाटर्स और एयर हेडक्वाटर्स में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं. उन्होंने भारतीय वायुसेना और देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने में भी योगदान दिया. आईआईटी कानपुर और पुणे यूनिवर्सिटी में एआईएफ चेयर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
सैनिक स्कूल की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी
एयर वाइस मार्शल बनने से पहले भी शक्ति शर्मा अपने नाम एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कर चुकी थीं. वह तीनों सेनाओं में किसी सैनिक स्कूल की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनी थीं. उन्होंने सैनिक स्कूल कपूरथला की प्रिंसिपल के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी. उनका कार्यकाल 7 अगस्त 2015 से 29 मई 2017 तक रहा.
प्रिंसिपल के तौर पर उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ छात्रों को NDA और Armed Forces में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने वाले कार्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभाई.
साल 1994 में शुरू हुआ था वायुसेना का सफर
शक्ति शर्मा को 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की एडुकेशन ब्रांच में कमीशन मिला था. इसके बाद करीब तीन दशक से अधिक के करियर में उन्होंने वायुसेना के विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों और मुख्यालयों में सेवाएं दीं. उनकी यात्रा अब एयर वाइस मार्शल की दो-स्टार रैंक तक पहुंच गई है, जो भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
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