Ranchi : झारखंड में शहर की सरकार चुनने के लिए आगामी 23 फरवरी को मतदान होना है। चुनाव भले ही पार्टी के सिंबल पर नहीं हो रहे हों, लेकिन लगभग सभी बड़ी पार्टियों ने अपने-अपने समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। ऐसे में चुनावी माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंग गया है। खासकर रांची नगर निगम के मेयर पद पर सबकी नजर टिकी हुई है।
बैलेट पेपर पर उठा विवाद
नगर निकाय चुनाव में इस बार ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी नेताओं ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। रांची से सांसद और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने चुनावी सभा में कहा कि सरकार जानबूझकर बैलेट पेपर से चुनाव करा रही है ताकि धांधली की गुंजाइश बनी रहे। उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का नाम लेते हुए तंज कसा और कहा कि सरकार “आंखें बंद, डब्बा गायब” वाले दौर की तरह चुनाव कराना चाहती है। उनका आरोप है कि सरकार चुनाव से डर गई है, इसलिए पुराने तरीके अपनाए जा रहे हैं।
रोशनी खलखो के समर्थन में रैली
संजय सेठ ने किशोरगंज में पार्टी समर्थित मेयर प्रत्याशी रोशनी खलखो के समर्थन में नुक्कड़ सभा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले नगर निकाय चुनाव कराना ही नहीं चाहती थी। रोशनी खलखो ने इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद कोर्ट के आदेश से चुनाव हो रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि मतदान के बाद बैलेट बॉक्स के साथ स्ट्रॉन्ग रूम तक जाएं और वहां निगरानी रखें, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
विपक्ष के आरोपों पर जवाब
विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी के बड़े नेता वार्ड और मेयर चुनाव में जरूरत से ज्यादा दखल दे रहे हैं। इस पर संजय सेठ ने कहा कि वह रांची के सांसद हैं और क्षेत्र में काम किया है, ऐसे में चुनाव के समय चुप नहीं बैठ सकते। उनका कहना है कि जनता के बीच जाना और अपने समर्थित उम्मीदवार के लिए प्रचार करना उनका अधिकार है।
राजद ने जताया विरोध
दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल ने चुनावी सभा में लालू प्रसाद यादव का नाम लेने पर आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष यादव ने कहा कि बीजेपी के नेता मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बेवजह उनके नेता का नाम ले रहे हैं। उनका दावा है कि निकाय चुनाव में बीजेपी अपनी हार भांप चुकी है, इसलिए इस तरह के बयान दे रही है।
मेयर चुनाव पर सबकी नजर
रांची नगर निगम के मेयर पद को लेकर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। भले ही चुनाव गैर-दलीय आधार पर हो रहे हों, लेकिन अंदरखाने सभी दल अपनी ताकत झोंक रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रचार और तेज होने की उम्मीद है। अब देखना है कि 23 फरवरी को जनता किसे शहर की जिम्मेदारी सौंपती है।
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