Ranchi : रांची स्थित वन मुख्यालय में सोमवार को एक अहम बैठक हुई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरे राज्य के वन अधिकारी जुड़े। बैठक की अध्यक्षता प्रधान मुख्य वन संरक्षक झारखंड संजीव कुमार ने की। मकसद साफ था, हाथी और इंसान के बीच बढ़ते टकराव को कैसे रोका जाए। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) रवि रंजन, मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) एस आर नटेश, वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रशासन बनकर अजिंक्य समेत सभी वन प्रमंडलों के डीएफओ, वन संरक्षक और आरसीसीएफ मौजूद रहे।
हाल के हादसों पर चिंता
संजीव कुमार ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में राज्य के कई जिलों में हाथियों के हमलों में लोगों की जान गई है। यह सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि गांवों में डर का माहौल है। ऐसे में तकनीकी सेवाओं को मजबूत करना होगा और ज़मीनी स्तर पर तैयारी बढ़ानी होगी। उन्होंने साफ कहा कि हाथी-प्रभावित इलाकों को जोन में बांटकर काम किया जाए और घटना की सूचना मिलते ही 30 मिनट के अंदर क्विक रिस्पांस टीम मौके पर पहुंचे।
12 दिन नहीं, कोशिश 7 दिन में मुआवजा
बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निर्देश दिया है कि हाथी या अन्य जंगली जानवरों के हमले, दुर्घटना या मृत्यु के मामलों में हर हाल में 12 दिनों के अंदर मुआवजा दिया जाए। संजीव कुमार ने अधिकारियों से कहा कि कोशिश होनी चाहिए कि 7 दिन के भीतर ही भुगतान कर दिया जाए। पीड़ित परिवार को लंबे इंतजार में नहीं रखा जाना चाहिए।
“हाथी को भगाइये मत, संभालिए”
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) रवि रंजन ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर प्रमंडल अपनी सीमा बचाने में न लगे। अगर हाथी एक इलाके से दूसरे इलाके में जा रहा है तो मिलकर काम करें। हाथी को सिर्फ भगाने की कोशिश न करें, बल्कि उसे शांत तरीके से उसके सुरक्षित इलाके तक पहुंचाने की रणनीति अपनाएं। उन्होंने कहा कि त्वरित कार्यबल हाथी के मूवमेंट पर नजर रखे और जरूरत पड़ने पर राज्य मुख्यालय से तुरंत मदद ली जाए।
गांवों की भूमिका सबसे अहम
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाए बिना समस्या का समाधान नहीं होगा। गांवों में जागरूकता अभियान चलाने, जरूरी उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराने और लोगों को बचाव के तरीके सिखाने की बात कही गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि हाथी-प्रोन एरिया की स्पष्ट पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखी जाए।
अनाज जमीन के नीचे, ताकि गंध न पहुंचे
मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) एस आर नटेश ने कहा कि साइलो के निर्माण को बढ़ावा दिया जाए। अनाज को जमीन के अंदर सुरक्षित रखा जाए ताकि उसकी गंध हाथियों तक न पहुंचे। इससे गांवों में घुसने की घटनाएं कम हो सकती हैं। इसके साथ ही चेक डैम निर्माण, घास के मैदान विकसित करने और माइक्रो हैबिटेट तैयार करने पर भी जोर दिया गया। उनका कहना था कि अगर जंगल में पानी, चारा और सुरक्षित माहौल होगा तो हाथी गांव की ओर कम आएंगे।
कॉरिडोर बचाना ही असली समाधान
बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य में करीब 680 हाथी हैं। उनकी सुरक्षा और इंसानों की सुरक्षा दोनों ही विभाग की जिम्मेदारी है। कॉरिडोर मैपिंग हो चुकी है, अब उसे जमीनी स्तर पर लागू करने की जरूरत है। ड्रोन, रेडियो कॉलर जैसे आधुनिक उपकरणों की खरीद और इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। एक जिले को जरूरत पड़े तो दूसरा जिला मदद करे, इस तरह टीम वर्क से काम करने का निर्देश दिया गया।
पांच दिन बाद फिर होगी समीक्षा
संजीव कुमार ने कहा कि दिए गए निर्देशों की पांच दिन बाद समीक्षा की जाएगी। मतलब साफ है कि इस बार सिर्फ बैठक नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखना चाहिए।
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