Ranchi : झारखंड के विभिन्न जिलों में अवैध तरीके से वेतन निकासी और सरकारी राशि के गबन मामले की जांच कर रही सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) अब घोटाले की परत-दर-परत जांच कर रही है। टीम तकनीकी साक्ष्य, बैंक लेन-देन और दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है। जांच में जैसे-जैसे तथ्य सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में अब महालेखाकार कार्यालय की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि यह घोटाला वर्षों से चल रहा था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि बार-बार ऑडिट होने के बावजूद गड़बड़ी पकड़ में क्यों नहीं आई।
ऑडिट टीम ने दी थी क्लीन चिट, महिला सदस्य ने खोला मामला
जानकारी के अनुसार, इसी वर्ष फरवरी महीने में महालेखाकार कार्यालय की एक ऑडिट टीम बोकारो गई थी। टीम में एक महिला सदस्य भी शामिल थी। महिला सदस्य ने ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितता पकड़ ली थी, लेकिन इसके बावजूद टीम ने बोकारो एसपी कार्यालय को ऑडिट में क्लीन चिट दे दी। हालांकि टीम रांची लौटने के बाद उस महिला सदस्य ने अनियमितता की शिकायत अपने वरिष्ठ अधिकारी से कर दी। इसी शिकायत के बाद मामले का खुलासा हुआ और फिर अन्य जिलों में भी भ्रष्टाचार व घोटाले की परतें खुलने लगीं।
चाईबासा केस को सीआईडी ने किया टेकओवर
अवैध वेतन निकासी मामले में पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के मुफ्फसिल थाना में दर्ज प्राथमिकी कांड संख्या 69/2026 (दिनांक 26 अप्रैल) को अब सीआईडी ने टेकओवर कर लिया है। इसके बाद इस केस को सीआईडी थाना रांची में कांड संख्या 07/2026 के तहत दोबारा दर्ज किया गया है। यह सीआईडी थाना रांची में इस घोटाले से जुड़ा तीसरा केस है। इससे पहले सीआईडी ने बोकारो स्टील सिटी थाना और हजारीबाग के लोहसिंघना थाना में दर्ज दो मामलों को भी टेकओवर कर री-रजिस्टर्ड किया था।
कोषागार पदाधिकारी के बयान पर दर्ज हुआ केस
यह प्राथमिकी चाईबासा के कोषागार पदाधिकारी सुमित कुमार के बयान पर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि प्रधान महालेखाकार कार्यालय द्वारा डेटा की समीक्षा के दौरान चाईबासा जिला कोषागार के अंतर्गत एसपी चाईबासा के डीडीओ कोड के जरिए कुछ बैंक खातों में मल्टीपल पेयी बनाकर अवैध लेन-देन का पता चला। महालेखाकार कार्यालय की समीक्षा में सामने आया कि पिछले कुछ वर्षों में 26 लाख 21 हजार 717 रुपये का अवैध लेन-देन किया गया है। इसके बाद विस्तृत जांच और कार्रवाई का आदेश दिया गया।
डीसी ने बनाई 7 सदस्यीय जांच टीम
मामले के सामने आने के बाद चाईबासा के उपायुक्त (डीसी) ने सात सदस्यीय जांच दल का गठन किया। जांच दल ने महालेखाकार कार्यालय की रिपोर्ट का सत्यापन किया। जांच में यह बात सामने आई कि प्रथम दृष्टया एसपी पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा कार्यालय के लेखा शाखा में पदस्थापित सिपाही देवनारायण मुर्मू की संलिप्तता पाई गई है।
सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ कर किया गबन
जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी सिपाही देवनारायण मुर्मू ने सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ की। उसने कंप्यूटर के माध्यम से डेटा में हेराफेरी कर धोखाधड़ी के उद्देश्य से सरकारी राशि का गबन किया और अवैध निकासी करवाई। जांच में यह भी सामने आया कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए विभिन्न खाताधारकों की मिलीभगत से साजिश के तहत सरकारी राशि निकालने का काम किया।
चार बैंक खातों में भेजे गए 26.21 लाख रुपये
जांच दल ने पुष्टि की है कि अवैध तरीके से निकाली गई राशि निम्नलिखित चार बैंक खातों में भेजी गई थी…
- एसबीआई पोटका (पूर्वी सिंहभूम) – खाता संख्या 31285896907
- एसबीआई टैगोर हिल, मोरहाबादी (रांची) – खाता संख्या 37885151142
- एसबीआई चाईबासा – खाता संख्या 33913184180
- एसबीआई बहालाडा, मयूरभंज (ओडिशा) – खाता संख्या 41378095759
इन सभी खातों में कुल 26 लाख 21 हजार 717 रुपये का लेन-देन पाया गया है।
सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी में अंतर
जांच में एक और गंभीर बात सामने आई है कि संबंधित विपत्रों (बिल/वाउचर) की सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी में भिन्नता पाई गई है। यानी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से बदला गया और कागजी रिकॉर्ड अलग रखा गया, ताकि गड़बड़ी पकड़ में न आए।
आरोपी का खाता सरकारी निकासी में इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया कि खाता संख्या 31285896907 का खाताधारक स्वयं देवनारायण मुर्मू है, जो एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में पदस्थापित है। उसने इन चार खातों का उपयोग कर सरकारी राशि की अवैध निकासी करवाई।
सीआईडी जांच में हो सकते हैं और खुलासे
सीआईडी एसआईटी अब बैंक लेन-देन, दस्तावेजों और तकनीकी सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि जांच के दौरान और भी जिलों में ऐसे ही मामलों का खुलासा हो सकता है तथा इसमें शामिल अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।


