Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने अधीक्षण अभियंता (एसई) के पद पर दी गई प्रोन्नति को चुनौती देने वाले एसटी-एससी वर्ग के इंजीनियरों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि पहले से जारी प्रोन्नति आदेशों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी कि वे अपने आरक्षण कोटे के तहत प्रोन्नति का दावा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर सिर्फ इंजीनियरिंग सेवा ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य सेवाओं में होने वाली प्रोन्नतियों पर भी पड़ सकता है।
12 इंजीनियरों की प्रोन्नति को दी गई थी चुनौती
यह मामला राज्य सरकार की ओर से 12 कार्यपालक अभियंताओं (ईई) को अधीक्षण अभियंता के पद पर दी गई प्रोन्नति से जुड़ा था। इस प्रोन्नति के खिलाफ हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनसे जूनियर इंजीनियरों को पहले प्रोन्नति दे दी गई, जबकि वे पहले से इस पद के लिए पात्र थे। इसलिए सरकार की ओर से 6 अगस्त 2019, 21 अक्टूबर 2022 और 11 जनवरी 2024 को जारी प्रोन्नति संबंधी अधिसूचनाओं को रद्द किया जाए।
SC और ST इंजीनियरों ने रखी अपनी दलील
पहली याचिका प्रदीप कुमार और राम बदन सिंह की ओर से दायर की गई थी। दोनों अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से हैं। उनका कहना था कि वे कार्यपालक अभियंता के पद पर पहले प्रोन्नत हुए थे, लेकिन बाद में पदोन्नत हुए इंजीनियरों को अधीक्षण अभियंता बना दिया गया। वहीं दूसरी याचिका कार्यपालक अभियंता रामेश्वर साह, देवा सहाय भगत, दुखा मुंडा, सुनील कुमार और बाल किशोर किस्कू की ओर से दाखिल की गई। ये सभी अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से हैं। इनका भी कहना था कि उनके जूनियर अधिकारियों को पहले प्रोन्नति देकर वरिष्ठता के सिद्धांत की अनदेखी की गई है।
प्रोन्नत अधिकारियों ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रोन्नत अधिकारियों की ओर से कहा गया कि उनकी नियुक्तियां वर्ष 1989 और 1995 में हुई थीं। सरकार ने 5 मई 2015 को सहायक अभियंताओं की जो वरीयता सूची जारी की थी, उसी के आधार पर उन्हें समय-समय पर प्रोन्नति दी गई। इसलिए प्रोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप है और इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। दोनों मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक साथ की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 6 अगस्त 2019, 21 अक्टूबर 2022 और 11 जनवरी 2024 को जारी प्रोन्नति संबंधी अधिसूचनाओं को रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यदि पात्र हैं तो वे अपने आरक्षण कोटे के तहत प्रोन्नति का दावा कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया जिक्र
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के आर.के. सभरवाल बनाम पंजाब सरकार मामले में तय किए गए सिद्धांतों के अनुरूप है। अदालत का मानना है कि इससे किसी भी संवर्ग में 100 प्रतिशत आरक्षण जैसी स्थिति नहीं बनेगी और आरक्षण की सीमा संविधान के अनुरूप 50 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला इंजीनियरिंग सेवा तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य के अन्य विभागों में प्रोन्नति से जुड़े मामलों में भी इस फैसले का हवाला दिया जा सकता है। ऐसे में यह आदेश भविष्य में आरक्षण और प्रोन्नति से जुड़े कई मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

