आदिल नवाब, जोहार लाइव
झारखंड के इकलौते सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज राजकीय होमियोपैथिक महाविद्यालय एवं अस्पताल, परसपानी पर एक बार फिर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है. गोड्डा जिला स्थित इस अस्पताल को बीते 22 जुलाई को नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (एनसीएच) की ओर से कॉलेज को नोटिस भेजा गया है. जिसमें कहा गया है कि कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी है. कई विभागों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर उपबल्ध नहीं हैं. यहां तक कि प्रिंसिपल के पद भी खाली हैं.
बता दें, एनसीएच हर साल देशभर के होमियोपैथिक कॉलेजों का इंस्पेक्शन करती है और रिपोर्ट के आधार पर अनुशंसा जारी करती है. यह एक स्वायत्त बॉडी है. जिसकी स्थापना साल 2020 में नेशनल कमिशन फॉर होमियोपैथिक एक्ट के तहत केंद्र सरकार द्वारा किया गया था. हाल ही में इसने गोड्डा के इस कॉलेज का इंस्पेक्शन भी किया था. जिसके बाद उसने यह नोटिस जारी किया है.
जारी पत्र में एनसीएच ने जिन बातों पर आपत्ति जताई है, उसके मुताबिक कॉलेज में 27 शिक्षकों की कमी पाई गई है. कई विभागों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर उपलब्ध नहीं हैं. इनमें एनाटॉमी, सर्जरी, गायनेकोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन, फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी, फार्मेसी, ऑर्गेनॉन, मटेरिया मेडिका आदि विभाग शामिल हैं. यही नहीं, प्रिंसिपल का पद भी खाली है.
इसके अलावा कई विभागों में अनिवार्य उपकरण, मॉडल, हिस्टोलॉजी स्लाइड, एक्स-रे फिल्में, MRI/CT स्कैन की शिक्षण सामग्री, जर्नल, लैब अटेंडेंट और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं थे. इसके अलावा प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी जिसमें, ऑफिस सुपरिंटेंडेंट, अपर डिवीजन क्लर्क जैसे आवश्यक प्रशासनिक पद भी खाली पाए गए. कॉलेज के अस्पताल में कई जरूरी सुविधाएं नहीं मिलीं, जैसे: नेशनल एक्रेडिएशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स (NABH)/ नेशनल एग्रेडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिबिरेशन लैबोरेट्रिज (NABL) से मान्यता नहीं मिला है. कॉलेज में स्किल लैब नहीं है. OPD/IPD का कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड नहीं है. यहां तक कि एम्बुलेंस, दिव्यांगों के लिए रैंप सहित कई जरूरी व्यवस्थाओं का अभाव है.
हालात और भी चिंताजनक हैं. एनसीएच के मुताबिक अस्पताल में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जनरल फिजिशियन, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, डाइटीशियन सहित कई विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं पाए गए. इन सब को देखते हुए कॉलेज पर अब मान्यता रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है.
भविष्य की चिंता, धरने पर बैठे छात्र
पत्र मिलने के ठीक दो दिन बाद यानी 24 जुलाई से कॉलेज में छात्र-छात्राएं अपनी बुनियादी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं. छात्रों का आरोप है कि वर्षों से कॉलेज में शिक्षकों, छात्रावास, प्रयोगशाला, अस्पताल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भारी कमी है. कई बार शिकायत और ज्ञापन देने के बावजूद स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ.
छात्रों का कहना है कि नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (NCH) लगातार कॉलेज की कमियों पर आपत्ति जताता रहा है. आवश्यक मानकों के पूरा नहीं होने के कारण 2023-24 में 63 सीटों पर होने वाला नामांकन घटकर अब 37 सीटों तक सीमित हो गया है. छात्रों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो कॉलेज की मान्यता और यहां पढ़ रहे विद्यार्थियों का भविष्य दोनों खतरे में पड़ सकता है.
मिली जानकारी के मुताबिक कॉलेज में शिक्षकों के 39 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 13 शिक्षक कार्यरत हैं. इसका सीधा असर नियमित कक्षाओं, प्रैक्टिकल और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है. साथ ही 14 मेडिकल ऑफिसर (एम.ओ.) के स्वीकृत पद हैं, लेकिन 5 ही थे. हाल ही में आनन-फानन में 5 और की नियुक्ति हुई है.
साल 2025 में शिक्षकों और एम.ओ. की भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन केवल उसमें 3 शिक्षकों ने ज्वाइन किया. बाकी ने कॉलेज के हालात देखकर आने से ही इनकार कर दिया. फिलहाल कॉलेज में सिर्फ 13 शिक्षक ही हैं और 24 पद खाली है.

पानी भी खरीदकर पीना पड़ता है
कॉलेज के तृतीय वर्ष के छात्र जावेद अंसारी ने बताया कि कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं के लिए हमें रोज़ जूझना पड़ता है. गोड्डा से 25 किलोमीटर दूर इस कॉलेज तक पहुंचने के लिए ही काफी मशक्कत करनी होती है. कॉलेज तक पहुंचने वाली सड़क में इतने गढ्ढे हैं कि 4 पहिया वाहनों का चलना मुश्किल है. पिछले साल गोड्डा के विधायक संजय यादव को कॉलेज में आमंत्रित किया गया था. उस दौरान उन्होंने वादा किया था कि अगले वर्ष तक सड़के बना दी जाएगी, लेकिन उसपर भी ध्यान नहीं दिया गया.
जावेद बताते हैं, ‘’हमारे लिए मेस तक की व्यवस्था नहीं है प्राइवेट मेस वाले बहुत ज्यादा चार्ज करते हैं और RO भी नहीं है कि शुद्ध पानी पिया जा सके. हमें जार से पानी मंगाना पड़ता है. यहां तक कि मेडिकल शिक्षा के लिए जरूरी कैडेवर (Cadaver- जहां लाश की एनाटॉमी की जाती है) उपलब्ध नहीं है, जिससे छात्रों को एनाटॉमी और अन्य प्रैक्टिकल प्रशिक्षण में कठिनाई होती है.’’
कैडेबर के संबंध में कॉलेज के प्राचार्य डॉ० अशोक पासवान ने बताया कि सिविल सर्जन ये के द्वारा अब तक उपलब्ध कराया जा सकता था. हमने उपायुक्त को चिठ्ठी लिखी, लेकिन इस मामले में अब तक कोई भी कदम नहीं उठाया गया है.
छात्राओं के लिए न हॉस्टल, न प्राइवेसी
एक अन्य छात्र कुंदन कुमार महतो ने छात्राओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने बताया, छात्राओं को रहने के लिए अलग छात्रावास उपलब्ध नहीं है. उन्हें एक ही बड़े हॉल में ठहराया जाता है, जो कि स्टाफ क्वार्टर हुआ करता था. जहां पर्याप्त निजता (Privacy) नहीं मिलती. उनका यह भी आरोप है कि यदि किसी छात्रा को मासिक धर्म (Periods) के दौरान आवश्यकता हो, तो कैंपस में सैनिटरी पैड जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है.
समस्याएं यहीं खत्म नहीं होती. छात्रों का कहना है कि BHMS इंटर्न को 17,500 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है, जबकि MBBS इंटर्न को 25,000 प्रतिमाह दिया जाता है. उनका आरोप है कि BHMS इंटर्न को स्टाइपेंड का भुगतान भी कई बार समय पर नहीं होता.
कॉलेज से जुड़े अस्पताल की स्थिति भी बेहद खराब है. अस्पताल में एक्स-रे मशीन नहीं है. जावेद अंसारी एक बार फिर कहते हैं, ECG की सुविधा नहीं है और इमरजेंसी सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि हॉस्पिटल में इमरजेंसी के लिए एलोपैथिक इलाज भी किया जा सकता है. लेकिन उसकी कोई भी सुविधा नहीं है. यदि किसी व्यक्ति को मामूली चोट भी लग जाए तो प्राथमिक उपचार (First Aid) तक उपलब्ध नहीं हो पाता.
जावेद अंसारी ने बताया कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी सार्वजनिक मंचों से यह कहते हैं कि 15 मिनट में एम्बुलेंस लोगों के घर तक पहुंच जाएगी, लेकिन कॉलेज अस्पताल परिसर में ही एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
पूरी स्थिति और अपने भविष्य की चिंता करते हुए छात्रों ने राज्य सरकार के समाने अपनी कुछ मांगे रखी हैं. इस संबंध में छात्रों ने गोड्डा उपयुक्त को सौंपे ज्ञापन भी सौंपा है. डीसी को दिए ज्ञापन में छात्रों ने मांग की है कि स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति की जाए, सभी स्वीकृत पदों पर शिक्षकों की भर्ती हो, महिला छात्रावास और इंटर्न हॉस्टल बनाया जाए.
इसके अलावा BHMS इंटर्न को MBBS के समान 25,000 स्टाइपेंड मिले, प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरण और कैडेवर उपलब्ध कराया जाए, अस्पताल में डॉक्टर, एक्स-रे, ECG, दवाइयां और अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, एम्बुलेंस सेवा शुरू की जाए.
साथ ही स्वच्छ पेयजल, मेस, बिजली बैकअप और खेल मैदान की व्यवस्था की जाए, कॉलेज तक जाने वाली सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए.
गोड्डा होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द नहीं होने दी जाएगी – डॉ. इरफान अंसारी*
*“गोड्डा होम्योपैथिक कॉलेज बंद नहीं होगा, चाहे कोई कितनी भी राजनीति कर ले – डॉ. इरफान अंसारी”*
*“हेमंत सरकार की गारंटी: गोड्डा कॉलेज रहेगा चालू, आयुष मंत्रालय दे सहयोग – डॉ. अंसारी”*
*“भाजपा… pic.twitter.com/PKJniarWWK
— Dr. Irfan Ansari (@IrfanAnsariMLA) July 4, 2025
एक बार फिर स्वास्थ्य मंत्री ने दिया आश्वासन
इन सब के बीच अहम सवाल ये है कि जब झारखंड के इकलौते सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को पानी, छात्रावास, शिक्षक, प्रयोगशाला, अस्पताल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए धरने पर बैठना पड़े, और हर वर्ष NCH की ओर से मानकों को लेकर सवाल उठते रहें, तो यह राज्य की स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है.
जब पिछले वर्ष NCH ने खराब गुणवत्ता का हवाला देकर अल्टीमेटम दिया था कि कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी जाएगी. इसके तत्काल बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर इरफान अंसारी ने ट्वीट किया था कि हम ऐसा होने नहीं देंगे. लेकिन इस बार फिर से NCH ने नोटिस उन्हें चिढ़ा रहा है और उनके दावों की पोल खोल रहा है.
जोहार लाइव के सवालों का जवाब देते हुए इरफान अंसारी ने कहा, हम नज़र बनाये हुए हैं और त्वरित कार्रवाई में जुटे हुए हैं. कॉलेज को बचाने में हम हर संभव प्रयास करेंगे. जिस तरह हमने राज्य में MBBS की सीटों बढाया है, उसी तरह हम होमियोपैथी कॉलेज को भी बंद होने नहीं देंगे.
वहीं कैडेबर के संबंध में बात करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, केंद्र का रवैया झारखण्ड के प्रति बिल्कुल ठीक नहीं है. किसी तरह होमियोपैथी कॉलेज हम चला रहे हैं. इसको बंद नहीं होने दिया जाएगा.
जब गोड्डा से 25 किलोमीटर दूर जंगलों के बीच एक होम्योपैथी कॉलेज बनाया जाता है, जहां बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी हो और इन सुविधाओं के लिए छात्र छात्राओं को धरने पर बैठना पड़े. हर साल NCH को नोटिस के जरिए मान्यता रद्द करने तक की नौबत आ जाए तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की क्या हालत हो गई है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है.

