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    Home»झारखंड»चांडिल में बेकाबू हाथी का कहर : कई घर तोड़ा, चट कर गया अनाज
    झारखंड

    चांडिल में बेकाबू हाथी का कहर : कई घर तोड़ा, चट कर गया अनाज

    Team JoharBy Team JoharMarch 21, 2026Updated:March 21, 2026No Comments2 Mins Read3
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    जंगली हाथी
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    Saraikela : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र के कांगलाटांड़, सालडीह और भालूककोचा गांव में शुक्रवार रात एक जंगली हाथी ने जमकर उत्पात मचाया। झुंड से बिछड़ा यह हाथी अचानक गांव में घुस आया और कई घरों को तोड़ दिया। इस दौरान घरों में रखा धान और चावल भी हाथी ने खा लिया, जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

    रातभर दहशत में रहे लोग

    हाथी के गांव में घुसते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। डर के कारण लोग अपने घरों में ही छिपे रहे। बच्चे और बुजुर्ग पूरी रात सहमे रहे और किसी अनहोनी की आशंका से लोग जागते रहे। पूरा गांव रातभर दहशत के माहौल में रहा।

    ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा

    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के दौरान वन विभाग की कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। ऐसे में ग्रामीणों ने खुद ही आगे आकर स्थिति संभाली। लोगों ने शोर-शराबा कर किसी तरह हाथी को गांव से खदेड़कर जंगल की ओर भगाया। हालांकि इस दौरान जान का खतरा बना रहा।

    वन विभाग की लापरवाही पर नाराजगी

    ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सूचना देने के बावजूद कोई भी टीम समय पर नहीं पहुंची। जबकि प्रभावित गांव वन विभाग कार्यालय से कुछ ही किलोमीटर दूर हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय पर कार्रवाई होती तो नुकसान को कम किया जा सकता था।

    जरूरी संसाधनों की भी कमी

    ग्रामीणों ने यह भी बताया कि हाथी को भगाने के लिए जरूरी संसाधन जैसे पटाखे, टॉर्च और मोबिल आदि की भी व्यवस्था नहीं दी गई। मजबूरी में लोगों को खुद ही जोखिम उठाकर हाथी को भगाना पड़ा।

    मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग

    घटना के बाद प्रभावित परिवारों ने नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा है कि इलाके में हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए स्थायी समाधान जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

    बढ़ता मानव-वन्यजीव टकराव

    यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ग्रामीण इलाकों में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासन और वन विभाग को मिलकर ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और नुकसान रोका जा सके।

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