Garhwa : भीषण गर्मी के बीच गढ़वा जिले में परियोजनाओं की बर्बादी और गलत इस्तेमाल पर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। उप विकास आयुक्त (डीडीसी) पशुपतिनाथ मिश्रा ने साफ कहा है कि जल जीवन मिशन की योजनाओं के पानी का इस्तेमाल खेतों की सिंचाई या निजी कामों में करने वालों को किसी भी हाल में नहीं बचेगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में डीडीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी लोगों की पहचान की जाए जो सार्वजनिक परियोजनाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। खासकर जो लोग पाइपलाइन के पानी से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं या निजी इस्तेमाल में लगा रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
पहले चेतावनी, फिर कड़ा एक्शन
डीडीसी ने कहा कि शुरुआत में ऐसे लोगों को चेतावनी दी जाए। अगर इसके बाद भी सुधार नहीं होता है, तो उनके घरों तक जलापूर्ति रोकने जैसे कड़े कदम उठाए जाएं। उन्होंने साफ किया कि पेयजल का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में बीडीओ को निर्देश दिया गया कि वे अपने क्षेत्र की जल सहियाओं के साथ बैठक करें। जल सहियाओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे गांव में निगरानी रखें और पानी के सही वितरण को सुनिश्चित करें। अगर कहीं भी अवैध उपयोग दिखे, तो तुरंत संबंधित जूनियर इंजीनियर को सूचना दें।
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बंद चापाकलों की मरम्मत में तेजी के निर्देश
पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया गया है कि जिले में बंद पड़े चापाकलों की सूची 7 दिनों के भीतर तैयार कर मरम्मत कार्य शुरू किया जाए। इसे युद्ध स्तर पर पूरा करने को कहा गया है। डीडीसी ने बताया कि ग्रामीण झार जल पोर्टल (टोल फ्री नंबर 1800-3456-502) पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अब तक मिली 1101 शिकायतों में से 797 का निपटारा किया जा चुका है, जबकि बाकी मामलों पर कार्रवाई जारी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पानी की बर्बादी रोकें और किसी भी तरह के दुरुपयोग की सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि सभी को समान रूप से पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
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