जोहार लाइव ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग को लेकर चल रहे विवाद में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी है. कोर्ट ने ₹25,000 के जुर्माने वाले पुराने आदेश को भी बरकरार रखा. चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी को सिर्फ इसलिए सार्वजनिक नहीं किया जा सकता क्योंकि वे देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं.
कोर्ट के मुताबिक किसी व्यक्ति की डिग्री, मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड उसकी व्यक्तिगत जानकारी के दायरे में आते हैं. विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान ऐसी जानकारी अपने छात्रों से जुड़े भरोसेमंद यानी फिड्यूशरी संबंध के तहत रखते हैं.
अदालत ने कहा कि RTI Act की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) के तहत ऐसी जानकारी के खुलासे पर छूट लागू होती है. हालांकि, अगर किसी मामले में बड़े जनहित में जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी हो, तो यह छूट लागू नहीं होगी.
प्रधानमंत्री का पद होने से डिग्री अपने आप जनहित की सूचना नहीं
डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रधानमंत्री जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, लेकिन केवल इस वजह से उनकी शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी अपने आप ‘जनहित’ या ‘व्यापक जनहित’ की श्रेणी में नहीं आ जाती. कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद पर चुने जाने का उनकी शैक्षणिक योग्यता से कोई सीधा संबंध नहीं है.
अदालत ने RTI के तहत ‘जनहित टेस्ट’ को सूचना के अधिकार और निजता के अधिकार के बीच संतुलन से जोड़ते हुए कहा कि किसी सूचना के खुलासे से संबंधित व्यक्ति की निजता और संभावित नुकसान को भी देखा जाना जरूरी है.
क्या है पूरा मामला ?
यह विवाद 2016 में शुरू हुआ था. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने गुजरात यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से जुड़ी डिग्री की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. इसके बाद गुजरात यूनिवर्सिटी ने CIC के आदेश को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी.
मार्च 2023 में हाईकोर्ट के सिंगल जज ने CIC के आदेश को रद्द कर दिया था और अरविंद केजरीवाल पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया था. इसके खिलाफ केजरीवाल ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी.
CIC के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल
डिवीजन बेंच ने कहा कि CIC ने केजरीवाल के एक पत्र को RTI आवेदन के तौर पर लेते हुए गुजरात यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी से प्रधानमंत्री की डिग्री से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने माना कि CIC का ऐसा निर्देश उसके अधिकार क्षेत्र और तय प्रक्रिया से जुड़ी सीमाओं के बाहर था.
कोर्ट ने यह भी कहा कि CIC के आदेश में यह पर्याप्त रूप से नहीं बताया गया था कि RTI Act की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) में दी गई छूट के बावजूद डिग्री से जुड़ी जानकारी का खुलासा व्यापक जनहित में क्यों जरूरी है.
गुजरात हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के.एस. पुट्टास्वामी और सीपीआईओ, भारत के सर्वोच्च न्यायालय बनाम सुभाष चंद्र अग्रवाल जैसे फैसलों में निजता और RTI से जुड़े सिद्धांतों का भी उल्लेख किया. अदालत ने कहा कि RTI के तहत सूचना मांगने का अधिकार और व्यक्ति का निजता का अधिकार, दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है.
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