रांची. बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए हैं. रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में बुधवार को हुई कार्यवाही के दौरान हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए. इस मामले में 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं.
मुख्यमंत्री की ओर से आरोप गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन विशेष पीएमएलए अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. इसके बाद हेमंत सोरेन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने हाई कोर्ट में दायर आपराधिक रिट याचिका में मांग की है कि ईडी की जांच से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने तक उनके खिलाफ आरोप तय करने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए.
हाई कोर्ट में भी पहुंचा मामला
विशेष अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए मुख्यमंत्री ने हाई कोर्ट का रुख किया है. मंगलवार को यह मामला हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, हालांकि विस्तृत सुनवाई नहीं हो सकी.
इससे पहले हुई सुनवाई में हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश हुए थे. उन्होंने मामले से जुड़े दस्तावेजों को देखने और उनका अध्ययन करने के लिए समय मांगा था. अदालत ने उस समय कहा था कि मामला अभी आरोप गठन के चरण में है.
क्या है बड़गाईं जमीन मामला?
पूरा मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है. प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की जांच में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े आरोप सामने आए हैं.
ईडी ने इस मामले में हेमंत सोरेन समेत कई लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है. जांच एजेंसी का आरोप है कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर कर इसे हासिल करने की कोशिश की गई.
16 आरोपियों पर पहले ही तय हो चुके हैं आरोप
इस मामले में विशेष पीएमएलए अदालत पहले ही अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर चुकी है. इनमें तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, बिपिन सिंह, राजकुमार पाहन, अफसर अली और मोहम्मद सद्दाम हुसैन समेत अन्य आरोपी शामिल हैं.
Also Read : CM की तस्वीर लगाकर झारखंड में बुर्का-हिजाब को लेकर भ्रामक पोस्ट, Hidden Biography पेज पर कार्रवाई की मांग

