केरल के आधिकारिक नाम को ‘Kerala’ से ‘Keralam’ करने की लंबे समय से चली आ रही मांग अब एक अहम पड़ाव पर पहुंच गई है. Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 को लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी 12 अगस्त को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही संविधान में दर्ज राज्य का नाम बदलने की संसदीय प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा.
बिल का मकसद संविधान की First Schedule में दर्ज ‘Kerala’ नाम को बदलकर ‘Keralam’ करना है. इसके लिए संविधान के संबंधित प्रावधानों में भी जरूरी संशोधन किए जाएंगे. यानी यह सिर्फ सरकारी दस्तावेजों में नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि संविधान में राज्य के आधिकारिक नाम को बदलने की प्रक्रिया है.
केरलम नाम नया नहीं, इतिहास पुराना है
Keralam कोई नया नाम नहीं है. मलयालम भाषा में राज्य को लंबे समय से ‘Keralam’ कहा जाता रहा है. वहीं संविधान और अंग्रेजी में इसका आधिकारिक नाम ‘Kerala’ रहा. नाम बदलने की मांग का एक प्रमुख आधार यही भाषाई और सांस्कृतिक पहचान है.
केरल के आधुनिक राज्य का गठन 1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान हुआ था. मलयालम भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बने इस राज्य का गठन ‘एकीकृत केरल’ की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम था. आज भी 1 नवंबर को Kerala Piravi यानी केरल स्थापना दिवस के तौर पर मनाया जाता है.
2023 में शुरू हुई मौजूदा नाम बदलने की प्रक्रिया
Kerala को Keralam करने की मौजूदा संवैधानिक प्रक्रिया करीब दो साल पहले शुरू हुई. अगस्त 2023 में केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया था. बाद में प्रस्ताव में संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ी कुछ तकनीकी खामियां सामने आने के बाद इसे दोबारा लाया गया.
इसके बाद 24 जून 2024 को केरल विधानसभा ने संशोधित प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया और केंद्र से संविधान की First Schedule में संशोधन कर राज्य का नाम ‘Keralam’ करने की मांग की. राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा.
फरवरी 2026 में केंद्र की मंजूरी
लंबी प्रक्रिया के बाद 24 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम ‘Kerala’ से ‘Keralam’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. इसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 तैयार किया गया.
बिल 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश हुआ, 11 अगस्त को लोकसभा ने इसे पारित किया और 12 अगस्त को राज्यसभा ने भी मंजूरी दे दी.
अब आगे क्या होगा?
संसद से मंजूरी मिलने के बाद अब बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए जाएगा. राष्ट्रपति की मंजूरी और कानून के लागू होने के बाद संविधान की First Schedule में ‘Kerala’ की जगह ‘Keralam’ दर्ज किया जाएगा. इसके साथ ही राज्य के नाम से जुड़े मौजूदा कानूनों और सरकारी रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव किए जा सकेंगे.
इस तरह ‘Kerala’ से ‘Keralam’ तक का सफर सिर्फ नाम बदलने की कवायद नहीं है. यह मलयालम भाषा में प्रचलित नाम को संवैधानिक पहचान देने की वर्षों पुरानी मांग के पूरा होने की दिशा में बड़ा कदम है.

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