जोहार लाइव ब्यूरो
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय और इसके अधीन आने वाले विभिन्न कॉलेजों में काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मियों का छह महीने से वेतन नहीं मिलने को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है. कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र देकर आंदोलन का ऐलान किया है. उनका कहना है कि अगर 1 अक्टूबर तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं हुआ तो वे विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी करेंगे और दोपहर 2 बजे सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी दी है.
आउटसोर्सिंग कर्मियों के मुताबिक, उन्होंने 24 सितंबर को ही विश्वविद्यालय प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था. इसके बावजूद अब तक वेतन भुगतान को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई है. कर्मचारियों का कहना है कि छह महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है और आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं.
कर्मियों ने तीन दिवसीय हड़ताल की भी घोषणा की है. इसके बाद विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी करने की बात कही गई है. कर्मचारियों का कहना है कि मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
निर्धारित वेतन और भुगतान में बड़ा अंतर
कर्मियों ने वेतन में कथित अनियमितता का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि कई पदों के लिए निर्धारित वेतन और उन्हें वास्तव में मिल रही राशि में काफी अंतर है.
कर्मियों के मुताबिक, गार्ड के लिए 24 हजार रुपये निर्धारित हैं, जबकि उन्हें 16,300 रुपये दिए जाते हैं. इसी तरह चपरासी के लिए 18,500 रुपये के बजाय 8,500 रुपये, कंप्यूटर ऑपरेटर और इलेक्ट्रीशियन के लिए 24,800 रुपये के बजाय 12 हजार रुपये, माली के लिए 18,700 रुपये के बजाय 12,800 रुपये और सफाई कर्मियों के लिए 16,300 रुपये के बजाय 7,500 रुपये भुगतान किए जाने का आरोप है.
आउटसोर्सिंग कर्मियों ने पीएफ को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि वेतन से पीएफ के नाम पर राशि की कटौती की गई, लेकिन अब तक कई कर्मचारियों के पीएफ अकाउंट नहीं खोले गए हैं. कर्मचारियों ने इस मामले में भी स्पष्ट जानकारी और कार्रवाई की मांग की है.
प्रमंडल में करीब 125 कर्मचारी
कर्मियों के अनुसार, पूरे पलामू प्रमंडल में नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय और उसके अधीन आने वाले कॉलेजों में करीब 125 आउटसोर्सिंग कर्मचारी काम कर रहे हैं. इनमें गार्ड, चपरासी, कंप्यूटर ऑपरेटर, इलेक्ट्रीशियन, माली और सफाई कर्मी शामिल हैं.
कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि 1 अक्टूबर तक छह महीने के बकाया वेतन का भुगतान किया जाए और वेतन व पीएफ से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाए. सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी के बाद मामला गंभीर हो गया है. अब विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और कर्मचारियों की मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर नजर है.

