Chaibasa : चाईबासा के सदर अस्पताल में भर्ती मरीज सुरेंद्र बोयपाई के ब्लड ग्रुप को लेकर सामने आई दो अलग-अलग जांच रिपोर्टों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सदर अस्पताल की पैथोलॉजी जांच रिपोर्ट में मरीज का ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव बताया गया है, जबकि कुछ दिनों बाद एक निजी प्रयोगशाला द्वारा जारी रिपोर्ट में उसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव दर्ज किया गया। दोनों रिपोर्टों में अंतर सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
एंटी करप्शन ऑफ इंडिया ने उठाई जांच की मांग
एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि पेरियार ने गुरुवार को कहा कि किसी मरीज के ब्लड ग्रुप संबंधी रिपोर्ट में इस तरह का अंतर गंभीर मामला है। उन्होंने जिला प्रशासन, सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच कराने की मांग की है। रामहरि पेरियार ने कहा कि ब्लड ग्रुप जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा जानकारी में गलती मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

विशेषज्ञों ने बताई संभावित वजहें
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार किसी व्यक्ति का ब्लड ग्रुप सामान्य परिस्थितियों में जीवनभर नहीं बदलता। ऐसे में दो अलग-अलग रिपोर्ट आने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नमूना लेने के दौरान गलती, सैंपल की अदला-बदली, जांच प्रक्रिया में तकनीकी त्रुटि, रिपोर्ट तैयार करने में मानवीय भूल या रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी जैसी वजहें इसके पीछे हो सकती हैं। इसलिए दोनों संस्थानों की जांच प्रक्रिया और रिकॉर्ड की समीक्षा आवश्यक है।
गलत रक्त चढ़ाने पर हो सकते हैं गंभीर परिणाम
चिकित्सकों के अनुसार यदि किसी मरीज को उसके वास्तविक ब्लड ग्रुप से अलग रक्त चढ़ा दिया जाए तो शरीर में गंभीर प्रतिक्रिया हो सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज को तेज बुखार, कंपकंपी, सांस लेने में परेशानी, रक्त कोशिकाओं के नष्ट होने, किडनी पर असर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में मरीज की जान को भी खतरा हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि सुरेंद्र बोयपाई के मामले में ऐसी कोई स्थिति बनी है या नहीं, इसका पता केवल आधिकारिक जांच के बाद ही चल सकेगा।

रिकॉर्ड और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग
रामहरि पेरियार ने मांग की है कि मामले में ब्लड बैंक के रिकॉर्ड, क्रॉस-मैचिंग रिपोर्ट, रक्त निर्गमन रजिस्टर, दोनों जांच रिपोर्टों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मरीज का मामला नहीं है, बल्कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों के भरोसे और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
पारदर्शी जांच से सामने आएगी सच्चाई
मामले को लेकर लोगों की नजर अब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिपोर्टों में अंतर तकनीकी गलती का परिणाम है या फिर किसी स्तर पर लापरवाही हुई है। स्थानीय लोगों ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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