रांची : झारखंड में आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID), झारखंड ने इस मामले में व्यापक स्तर पर जांच शुरू कर दी है। विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ियों और पेपर लीक से जुड़े मामलों की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और संदिग्ध व्यक्तियों के बीच हुए संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
सीआईडी के अनुसार, अब तक की जांच में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि झारखंड की परीक्षाओं में सक्रिय गिरोह का संबंध अन्य राज्यों में हुई प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितताओं से भी हो सकता है। इसी क्रम में वर्ष 2018 में आयोजित बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक नियुक्ति परीक्षा, वर्ष 2013 की शिक्षक पात्रता परीक्षा, केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) की भर्ती परीक्षा, रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की परीक्षाओं तथा वर्ष 2014 में आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की परीक्षा से जुड़े तथ्यों का भी परीक्षण किया जा रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्ष 2018 की सब-इंस्पेक्टर प्रतियोगिता परीक्षा, वर्ष 2014 में आयोजित सहायक अभियंता (ACF), वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO), सहायक वन संरक्षक (FSO) सहित कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित दस्तावेजों और अभ्यर्थियों की जानकारी का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन परीक्षाओं में भी किसी संगठित नेटवर्क ने अवैध तरीके अपनाए थे।
सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर की जा रही है। जांच के दायरे में उन व्यक्तियों और संस्थाओं को भी शामिल किया गया है, जिन पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने या अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का संदेह है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसी ने अभ्यर्थियों और आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी के पास परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक या फर्जीवाड़े से संबंधित कोई विश्वसनीय जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो वे उन्हें सीआईडी के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। विभाग का मानना है कि जनता के सहयोग से जांच को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
इस बीच, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई अभ्यर्थियों ने निष्पक्ष जांच का स्वागत करते हुए कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच समयबद्ध तरीके से पूरी होती है और दोषियों को दंड मिलता है, तो इससे सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। फिलहाल, सीआईडी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.
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