अधिकतर खिलाड़ियों के लिए संन्यास का मतलब होता है मैदान से विदाई और करियर पर पूर्ण विराम. लेकिन सुनील छेत्री की कहानी कुछ अलग है. उनके लिए संन्यास शायद पूर्ण विराम नहीं, बल्कि एक अल्पविराम रहा. करीब दो दशक तक भारतीय फुटबॉल टीम की जर्सी पहनने के बाद जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कहा, तो लगा कि उनके करियर का सबसे बड़ा अध्याय खत्म हो गया है. लेकिन फुटबॉल से उनका रिश्ता इतना गहरा था कि कहानी ने जल्द ही एक नया मोड़ ले लिया.
एक तरफ राष्ट्रीय टीम से विदाई का भावुक पल था, तो दूसरी तरफ क्लब फुटबॉल के मैदान पर उनका सफर जारी था. फिर टीम को उनकी जरूरत महसूस हुई और उन्होंने दोबारा मैदान पर लौटने का फैसला किया. यह फैसला आसान नहीं था. खुद छेत्री के मुताबिक, ज्यादातर लोगों ने उन्हें वापसी न करने की सलाह दी थी. लेकिन आखिरकार उन्होंने वही किया, जो उनके करियर में बार-बार उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है ,अपने दिल की सुनी.
आज छेत्री जब बेंगलुरु के मैदान पर उतरते हैं, तो स्टेडियम में उनके नाम के नारे गूंजते हैं. लेकिन इस कहानी की शुरुआत इतनी शानदार नहीं थी. कभी ऐसा भी समय था, जब छेत्री और उनके साथी लोगों को मैच देखने के लिए बुलाने के लिए ऑटो ड्राइवरों और दुकानदारों को पर्चे बांटा करते थे. वहां से भरे हुए स्टेडियम और हजारों प्रशंसकों तक का यह सफर सिर्फ एक खिलाड़ी की लोकप्रियता की कहानी नहीं है. यह एक खिलाड़ी और शहर के बीच बने उस रिश्ते की कहानी है, जो धीरे-धीरे परिवार जैसा हो गया.
फुटबॉलर नहीं बनना चाहते थे छेत्री
सुनील छेत्री के बारे में एक दिलचस्प बात कम ही लोगों को पता है कि वह कभी पेशेवर फुटबॉलर नहीं बनना चाहते थे. छेत्री ने खुद स्वीकार किया है कि वह शौकिया तौर पर फुटबॉल खेलते थे ताकि किसी अच्छे कॉलेज में स्पोर्ट्स कोटे से एडमिशन हो जाए. सुनील के पिता आर्मी में थे और उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने का मौका मिला था. फुटबॉल उन्होंने शौकिया खेलना शुरू किया था लेकिन उनके शुरुआती कोच ने उन्हें फुटबॉलर बनने के लिए प्रेरित किया था.
कोच ने कहा था तुम टीम के लायक नहीं
सुनील छेत्री जब साल 2012 में पुर्तगाल के क्लब स्पोर्टिंग लिस्बन से जुड़े थे तो उस टीम के हेड कोच ने उनकी बेइज्जती की थी. सुनील छेत्री ने एक इंटरव्यू में बताया कि कोच ने उनकी काबिलियत पर सवाल उठाते हुए उन्हें ए टीम से बी टीम में भेजने की बात कही थी. सुनील छेत्री 9 महीने तक क्लब के साथ जुड़े रहे जिसमें उन्हें महज 5 मैच खेलने का मौका मिला. छेत्री अमेरिका के कन्सास सिटी विजार्ड्स से भी 2010 में जुड़े थे हालांकि एक साल के अंदर ही वो भारत लौट आए थे.
मां-पिता भी थे फुटबॉलर
बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि सुनील छेत्री के पिता भी एक फुटबॉलर रहे हैं और उनकी मां ने भी नेपाल के लिए फुटबॉल खेला है. उनके पिता केबी छेत्री भारतीय सेना की टीम में खेलते थे वहीं उनकी मां सुशीला छेत्री अपनी जुड़वां बहन के साथ नेपाल की राष्ट्रीय टीम में खेलती थीं. छेत्री ने सोनम भट्टाचार्य से शादी की. सोनम उनके कोच की ही बेटी हैं, वह छेत्री को तब से पसंद करती थीं, जब वह सिर्फ 15 साल की थीं और छेत्री 18 साल के थे और फुटबॉल में अभी अपनी मंजिल तलाश रहे थे.
सुन्नील छेत्री के कुछ बड़े रिकार्ड्स
- भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय करियर में सबसे ज्यादा मैच खेलने का रिकार्ड सुनील छेत्री के नाम है. अंतर्राष्ट्रीय करियर में छेत्री अबतक 142 मैच खेल चुके है.
- अंतर्राष्ट्रीय सबसे ज्यादा मैच खेलने के साथ ही वे भारत की तरफ से सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी भी है. अंतर्राष्ट्रीय करियर के कुल मैचों में वे 92 गोल लगा चुके है.
- अंतर्राष्ट्रीय करियर में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की ओवरऑल सूची में सुनील छेत्री चौथे पायदान पर मौजूद है. जबकि बतौर एक्टिव खिलाड़ी वे तीसरे सर्वाधिक गोल स्कोरर है.
- अंतर्राष्ट्रीय गोल प्रति मैच के हिसाब से सुनील छेत्री (0.65), रोनाल्डो (0.62) और मेसी (0.59) से आगे है.
- सुनील छेत्री को रिकॉर्ड सात बार एआईएफएफ प्लेयर ऑफ द ईयर (AIFF Player of the Year Awards) का पुरस्कार मिल चुका है. यह अवॉर्ड उन्हें साल 2007, 2011, 2013, 2014, 2017, 2018-19 और 2021-22 में मिले.
- सुनील छेत्री तीन अलग-अलग महाद्वीपों – एशिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में खेल चुके हैं. ऐसा करने वे एकमात्र भारतीय भी खिलाड़ी हैं.
- सुनील छेत्रों भारत के लिए सबसे ज्यादा हैट्रिक लगाने वाले खिलाड़ी भी है. उन्होंने कुल तीन बार तजाकिस्तान, वियतनाम और चीनी ताइपे के खिलाफ हैट्रिक लगाईं है.
फीफा ने रिलीज की डाक्यूमेंट्री सीरीज
भारत के सबसे बड़े फुटबालरों में से एक सुनील छेत्री देश के सर्वकालिक टाप गोल स्कोरर और सर्वाधिक मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं. वह फुटबाल की दुनिया में सबसे ज्यादा गोल दागने वाले क्रिस्टियानो रोनाल्डो (117) और लियोनल मेसी (90) के बाद तीसरे पायदान पर काबिज हैं. 38 वर्षीय सुनील छेत्री अभी तक कुल 131 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं और इस दौरान 84 गोल दाग चुके हैं. सुनील छेत्री अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल करने के मामले में फुटबाल के जादूगर के नाम से मशहूर पेले को पहले ही पीछे छोड़ चुके हैं. दुनिया के तीसरे सबसे ज्यादा गोल दागने वाले खिलाड़ी और भारतीय फुटबाल टीम के कप्तान सुनील छेत्री के जीवन और उनके करियर को सम्मान देने के लिए हाल ही में विश्व फुटबाल को चलाने वाली संस्था फेडरेशन इंटरनेशनल आफ फुटबाल एसोसिएशन (फीफा) ने डाक्यूमेंट्री सीरीज रिलीज की है. तीन एपिसोड की बनाई गई इस शानदार सीरीज को ‘कैप्टन फैंटास्टिक’ के नाम से रिलीज किया गया है. वर्ष 2011 में सुनील को अर्जुन अवार्ड, 2019 में पद्मश्री और 2021 में खेल रत्न से सम्मानित किया जा चुका है. अब फीफा के द्वारा दिया गया यह सम्मान भी देश के लिए गौरव की बात है.
विदेशी लीग में खेलने वाले तीसरे भारतीय फुटबालर बने
धीरे-धीरे सुनील के भीतर विदेशी क्लबों में खेलने के प्रति भी कुछ दिलचस्पी पैदा हुई और 2007 में उन्होंने इंग्लैंड में कोवेंट्री सिटी के लिए एक ट्रायल दिया, लेकिन आगे नहीं बढ़ सके. हालांकि, वर्ष 2010 में सुनील छेत्री ने यूएसए के मेजर लीग साकर में कैनसस सिटी विजार्ड्स के लिए कान्ट्रैक्ट साइन किया और विदेशी लीग में खेलने वाले वो मोहम्मद सलीम और बाईचुंग भूटिया के बाद तीसरे भारतीय फुटबालर बने. सुनील छेत्री को पहली बार वर्ष 2005 में सीनियर भारतीय फुटबाल टीम में शामिल किया गया और उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला गोल किया. वर्ष 2007 में हुए नेहरू कप में सुनील छेत्री के चार गोल ने टीम को वर्ष 1997 के बाद पहली बार ट्राफी जीतने में मदद की. सुनील ने वर्ष 2008 के एशियन फुलबाल चैलेंज कप में चार गोल दागे. उनके बेहतरीन प्रदर्शन के कारण भारत ने टूर्नामेंट जीता था. इसके बाद उन्हें भारतीय फुटबाल के पोस्टर ब्वाय के रूप में देखा जाने लगा. उनके करियर का सबसे शानदार पल 2011 साउथ एशिया फुटबाल फेडरेशन चैंपियनशिप में देखने को मिला. इसमें सात गोल दागकर सुनील टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोरर बन गए. ये एक सीजन में किसी भी खिलाड़ी द्वारा किया गया सबसे अधिक गोल था.
मुंबई सिटी एफसी ने इंडियन सुपर लीग के सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ी के रूप में खरीदा
2015 में भारत में एक नई लीग बनाई गई, जिसका नाम था इंडियन सुपर लीग. मुंबई सिटी एफसी ने उन्हें 2015 में इंडियन सुपर लीग के सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ी के रूप में खरीदा. सुनील छेत्री ने स्कोर करना जारी रखा और 2016 में मुंबई सिटी एफसी को पहली बार प्लेआफ में पहुंचाने में अपना योगदान दिया और आइएसएल में हैट्रिक बनाने वाले पहले भारतीय बने. 2018 के इंटरकांटिनेंटल कप में सुनील छेत्री ने केन्या के खिलाफ भारतीय फुटबाल टीम के लिए अपना 100वां मैच खेला, जिसमें उन्होंने लगातार गोल किए और ट्राफी जीतने में टीम की मदद की. छह बार आल इंडिया फुटबाल फेडरेशन (एआइएफएफ) प्लेयर आफ द ईयर रहे सुनील छेत्री युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं.
Also Read : रांची की फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से इकट्ठा किया साक्ष्य, मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में होगा बॉडी का पोस्टमार्टम

