Ranchi : पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामले सामने आने के बाद झारखंड का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने शुक्रवार को राज्य के सभी सिविल सर्जनों (CS) को सतर्क रहने और एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि सभी जिलों में लोगों को निपाह वायरस से बचाव के प्रति जागरूक करने को कहा गया है। साथ ही किसी भी संभावित आउटब्रेक की स्थिति में क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का गठन कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। निपाह वायरस को लेकर विभाग की ओर से एडवाइजरी भी जारी की गई है।
सीमावर्ती जिलों में ज्यादा खतरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, रांची समेत झारखंड के 10 जिले पश्चिम बंगाल से सटे हुए हैं, ऐसे में इन इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सभी सिविल सर्जनों को जारी गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
रिम्स और सदर अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड तैयार
संभावित खतरे को देखते हुए राज्य के प्रमुख अस्पतालों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
रिम्स (RIMS), रांची में 22 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है।
सदर अस्पताल में 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड उपलब्ध है।
अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल झारखंड के किसी भी जिले से निपाह वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है।
जूनोटिक बीमारी है निपाह वायरस
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जो मुख्य रूप से चमगादड़ों और सूअरों से फैलती है। इसी वजह से संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
इलाज में देरी से हो सकती हैं गंभीर जटिलताएं
डॉक्टरों का कहना है कि निपाह संक्रमण के इलाज में देरी होने पर एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन) हो सकता है। इससे गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिनमें दौरे पड़ना, भ्रम की स्थिति, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और श्वसन संबंधी समस्याएं शामिल हैं।
निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण
- बुखार – संक्रमण का पहला संकेत
- खांसी – सूखी या बलगम वाली
- गले में खराश
- तेज सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द और थकान
डॉक्टरों की अहम सलाह
चिकित्सक डॉ. मनोज ने बताया कि निपाह संक्रमण का सबसे संभावित स्रोत चमगादड़ों की लार या मूत्र से दूषित फल होते हैं। इसमें कच्चा खजूर का रस भी शामिल है, जो चमगादड़ों के संपर्क में आने से संक्रमित हो सकता है।
सलाह:
- जमीन से खोदे या खुरचे हुए फल न खाएं
- कच्चा खजूर का रस पीने से बचें
- संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
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