Garhwa : जिले में ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहल करते हुए गढ़वा प्रशासन सोलर विलेज विकसित करने की दिशा में अंतिम चरण में काम कर रहा है। इस योजना के तहत चयनित गांव में पारंपरिक बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर सोलर एनर्जी आधारित सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे गांव ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा और बिजली कटौती की समस्या खत्म होगी।
मिली जानकारी के अनुसार सोलर विलेज में घर, कृषि और सार्वजनिक सभी गतिविधियां सोलर ऊर्जा पर आधारित होंगी। प्रत्येक घर को सोलर आधारित विद्युत कनेक्शन मिलेगा, जिससे बल्ब, पंखा, कूलर, एसी, आयरन, मिक्सी और अन्य विद्युत उपकरण आसानी से चल सकेंगे। इसके साथ ही इंडक्शन आधारित विद्युत चूल्हे का उपयोग भी संभव होगा, जिससे रसोई गैस पर निर्भरता कम होगी और घरेलू खर्च घटेगा।
गांव की सड़कों और संस्थानों में रोशनी सोलर से
योजना के अंतर्गत गांव की सभी प्रमुख और आंतरिक सड़कों पर सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी। पंचायत भवन, स्वास्थ्य उपकेंद्र, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य सरकारी व सार्वजनिक भवन भी सोलर सिस्टम से जुड़े होंगे। इससे रात में रोशनी की समस्या समाप्त होगी और जन सेवाएं सुचारू रूप से चलेंगी।
किसानों को बड़ी राहत
सोलर विलेज का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। खेतों में उपयोग होने वाले सिंचाई पंप सोलर सिस्टम से संचालित होंगे। इससे बिजली कटौती, बिल और डीजल खर्च से राहत मिलेगी और समय पर सिंचाई होने से फसल उत्पादन और आय बढ़ने की उम्मीद है। विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता असगर अली ने बताया कि करीब पांच हजार की आबादी वाले 10 गांवों की सूची झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ज्रेडा) को भेजी जा चुकी है। तकनीकी जांच और मानकों के आधार पर इनमें से एक गांव को सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के अवसर
इस परियोजना से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और सोलर सिस्टम की स्थापना, रखरखाव और निगरानी के लिए स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल हुआ, तो गढ़वा जिले के अन्य गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से सोलर मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यह योजना जिले को हरित ऊर्जा और सतत विकास की दिशा में नई पहचान दिला सकती है।
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